India's economy has gained momentum.

भारत की अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत; निवेश, खपत और निर्यात ने दिया जोरदार सहारा

डेस्क । वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत मजबूत प्रदर्शन के साथ की है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि भारतीय रिजर्व बैंक के 7 प्रतिशत के अनुमान से भी अधिक है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को देखें तो इस बार विकास केवल किसी एक क्षेत्र के भरोसे नहीं रहा। निवेश में तेज वृद्धि हुई है, घरेलू खपत मजबूत बनी हुई है, विनिर्माण क्षेत्र ने रफ्तार पकड़ी है, सेवा क्षेत्र ने दोहरे अंक में वृद्धि दर्ज की है और निर्यात में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। पहली तिमाही के बाद जुलाई के औद्योगिक उत्पादन और निर्यात के आंकड़े भी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बने रहने का संकेत दे रहे हैं।

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में स्थिर कीमतों पर वास्तविक GDP का अनुमान 81.36 लाख करोड़ रुपये लगाया गया है। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वास्तविक GDP वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत थी। इस लिहाज से एक साल में वृद्धि दर में करीब 0.9 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है।

वर्तमान कीमतों पर नॉमिनल GDP का अनुमान 88.27 लाख करोड़ रुपये है। इसमें पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के 8.1 प्रतिशत की तुलना में 10.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

GDP किसी निश्चित अवधि में देश की घरेलू अर्थव्यवस्था में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को दर्शाता है। इसलिए GDP में वृद्धि को अर्थव्यवस्था की गतिविधियों और उत्पादन की दिशा समझने का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

RKDF
advertisement

GVA में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि

GDP के साथ-साथ सकल मूल्य वर्धन यानी GVA के आंकड़े भी अर्थव्यवस्था की मजबूती की तस्वीर पेश करते हैं। पहली तिमाही में वास्तविक GVA 8.2 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसकी वृद्धि दर 7 प्रतिशत थी।

वास्तविक GVA का अनुमान पहली तिमाही में 73.82 लाख करोड़ रुपये लगाया गया है। वहीं वर्तमान कीमतों पर नॉमिनल GVA करीब 80.53 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें पिछले साल की तुलना में 11.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

GVA से यह समझने में मदद मिलती है कि अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों—जैसे कृषि, उद्योग और सेवाओं—का आर्थिक गतिविधियों में कितना योगदान रहा है।

निवेश में सबसे बड़ी तेजी

पहली तिमाही के आंकड़ों में सबसे महत्वपूर्ण बात निवेश की रफ्तार है। सकल स्थिर पूंजी निर्माण यानी GFCF में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इसकी वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत थी।

यानी निवेश की गति करीब दोगुनी हुई है। अर्थव्यवस्था के लिए निवेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा संबंध नई उत्पादन क्षमता, मशीनरी, निर्माण, बुनियादी ढांचे और भविष्य की आर्थिक गतिविधियों से होता है।

निवेश में इस तेजी को अर्थव्यवस्था में कारोबारी गतिविधियों और क्षमता विस्तार के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है।

घरेलू खपत भी बनी मजबूत

भारत की अर्थव्यवस्था में घरेलू मांग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। पहली तिमाही में निजी अंतिम उपभोग व्यय यानी परिवारों की ओर से वस्तुओं और सेवाओं पर किया गया खर्च 7.1 प्रतिशत बढ़ा।

पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में निजी खपत में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। यानी घरेलू खपत की रफ्तार भी थोड़ी बेहतर हुई है।

निवेश और निजी खपत दोनों में मजबूती इस बात का संकेत देती है कि आर्थिक वृद्धि को केवल सरकारी खर्च या निर्यात के भरोसे नहीं बल्कि घरेलू मांग से भी सहारा मिल रहा है।

निर्यात में 12 प्रतिशत की वृद्धि

पहली तिमाही में भारत के निर्यात ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह वृद्धि 6 प्रतिशत थी।

यानी निर्यात वृद्धि की रफ्तार एक साल में दोगुनी हुई है। वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के बावजूद निर्यात में यह बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा सकती है।

सेवा क्षेत्र ने दिखाई दोहरे अंक की रफ्तार

भारत की आर्थिक वृद्धि में सेवा क्षेत्र लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक GVA के आधार पर तृतीयक यानी सेवा क्षेत्र में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

पिछले साल इसी तिमाही में सेवा क्षेत्र की वृद्धि 8 प्रतिशत थी।

वित्तीय सेवाओं, रियल एस्टेट, सूचना प्रौद्योगिकी और पेशेवर सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में 12.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ आधुनिक सेवा क्षेत्रों की गतिविधियां भी तेज हुई हैं।

विनिर्माण क्षेत्र ने भी पकड़ी रफ्तार

द्वितीयक क्षेत्र की वृद्धि दर पहली तिमाही में 8.6 प्रतिशत रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 6.1 प्रतिशत थी।

विनिर्माण क्षेत्र इसमें प्रमुख भूमिका में रहा। पहली तिमाही में विनिर्माण में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

विनिर्माण के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उत्पादन तेजी से बढ़ा। विद्युत उपकरणों के उत्पादन में 27 प्रतिशत, अन्य परिवहन उपकरणों में 19.5 प्रतिशत, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल उत्पादों में 12.4 प्रतिशत तथा मशीनरी और उपकरणों के उत्पादन में 9.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।

पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में भी पहली तिमाही में 15.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। पिछले साल इसी अवधि में यह वृद्धि 8.8 प्रतिशत थी।

यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पूंजीगत वस्तुओं की मांग और उत्पादन में वृद्धि को औद्योगिक क्षमता तथा निवेश गतिविधियों से जोड़ा जाता है।

जुलाई में भी औद्योगिक गतिविधियां मजबूत

पहली तिमाही के बाद जुलाई के आंकड़े भी अर्थव्यवस्था की रफ्तार बने रहने का संकेत दे रहे हैं।

जुलाई 2026 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी IIP में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जुलाई 2025 में इसकी वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत थी।

अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच औद्योगिक उत्पादन में संचयी वृद्धि 6.3 प्रतिशत रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 4 प्रतिशत थी।

जुलाई में पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में सालाना आधार पर 16.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कच्चे माल और मध्यवर्ती वस्तुओं के उत्पादन में 10 प्रतिशत तथा बुनियादी ढांचे और निर्माण सामग्री में 6.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इससे संकेत मिलता है कि उद्योग क्षेत्र में केवल तैयार माल का उत्पादन ही नहीं, बल्कि मशीनरी, कच्चे माल और निर्माण से संबंधित गतिविधियों में भी तेजी आई है।

प्रमुख उद्योगों की वृद्धि भी बढ़ी

प्रमुख उद्योगों का सूचकांक यानी Index of Core Industries भी जुलाई में बेहतर रहा। जुलाई 2026 में इसमें सालाना आधार पर 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान प्रमुख उद्योगों के सूचकांक में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। पिछले साल इसी अवधि में यह वृद्धि केवल 1.5 प्रतिशत थी।

कोर इंडस्ट्रीज में सुधार को अर्थव्यवस्था के औद्योगिक आधार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसमें ऊर्जा और बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रमुख उद्योग शामिल होते हैं।

निर्यात 80 अरब डॉलर के पार

जुलाई में भारत के कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात का अनुमान 80.14 अरब डॉलर रहा। जुलाई 2025 के मुकाबले इसमें 13.31 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान कुल निर्यात करीब 316.42 अरब डॉलर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 279.63 अरब डॉलर था। यानी चार महीने की अवधि में निर्यात में 13.16 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

निर्यात में लगातार वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक बाजार में व्यापार संबंधी अनिश्चितता बनी हुई है। इसलिए आने वाले महीनों में निर्यात का प्रदर्शन भारतीय अर्थव्यवस्था की गति के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

उद्योग और सेवा क्षेत्र को बैंक कर्ज में तेज बढ़ोतरी

आर्थिक गतिविधियों में तेजी का असर बैंक ऋण के आंकड़ों में भी दिखाई देता है।

जुलाई 2026 में उद्योग क्षेत्र के लिए बैंक ऋण में 20 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज हुई। जुलाई 2025 में उद्योग को बैंक ऋण की वृद्धि दर केवल 6.5 प्रतिशत थी।

सेवा क्षेत्र को दिए गए बैंक ऋण में भी तेज वृद्धि हुई। जुलाई 2026 में सेवा क्षेत्र का बैंक ऋण 22.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 10.2 प्रतिशत था।

कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए बैंक ऋण में भी 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि जुलाई 2025 में यह 7.3 प्रतिशत था।

ऋण में इस तरह की वृद्धि को कारोबारी गतिविधियों, कार्यशील पूंजी और निवेश की मांग में बढ़ोतरी के संकेत के रूप में देखा जा सकता है।

पिछले वर्षों की GDP वृद्धि के आंकड़े भी संशोधित

राष्ट्रीय खातों के संशोधित अनुमानों में पिछले तीन वित्त वर्षों की वास्तविक GDP वृद्धि दर को भी ऊपर संशोधित किया गया है।

वित्त वर्ष 2023-24 की GDP वृद्धि दर का पूर्व अनुमान 7.2 प्रतिशत था, जिसे संशोधित कर 7.3 प्रतिशत किया गया है।

वित्त वर्ष 2024-25 की वृद्धि दर को 7.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत किया गया है।

वित्त वर्ष 2025-26 की वृद्धि दर भी 7.7 प्रतिशत से संशोधित होकर 7.8 प्रतिशत हुई है।

इन संशोधनों का अर्थ यह है कि पिछले कुछ वर्षों के लिए राष्ट्रीय आय के आंकड़ों की नई गणना के बाद आर्थिक वृद्धि की तस्वीर पहले के अनुमानों की तुलना में थोड़ी मजबूत हुई है।

नए आंकड़ों और पद्धति के आधार पर संशोधन

राष्ट्रीय खातों के संशोधित अनुमानों में आधार वर्ष 2022-23 के साथ नए मूल्य और उत्पादन सूचकांकों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स यानी PPI और बैंकिंग सर्विसेज प्राइस इंडेक्स जैसे सूचकांकों को शामिल किया गया है।

इसके अलावा अलग-अलग स्रोतों से मिले अपडेटेड प्रशासनिक आंकड़ों को भी राष्ट्रीय खातों की गणना में शामिल किया गया है।

इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था में वास्तविक गतिविधियों को पहले की तुलना में अधिक बेहतर तरीके से मापना है।

सरकार की नीतियों से विनिर्माण को बढ़ावा

आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए सरकार ने 2026 में विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, एमएसएमई, ऊर्जा, व्यापार और कृषि क्षेत्र में कई नीतिगत फैसले लिए हैं।

मोबाइल फोन निर्माण योजना का कुल परिव्यय 2030-31 तक 62,500 करोड़ रुपये रखा गया है। इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन, मूल्यवर्धन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना है।

सेमीकॉन 2.0 के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसके तहत चिप डिजाइन और निर्माण के साथ उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान, सामग्री, उपकरण और प्रतिभा विकास पर जोर दिया गया है।

रासायनिक क्षेत्र में तीन समर्पित रासायनिक पार्कों की स्थापना के लिए पांच साल की अवधि में 3,030 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

एमएसएमई क्षेत्र के लिए आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना 5.0 के तहत अतिरिक्त ऋण प्रवाह को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के अनुसार इससे पश्चिम एशिया में बने हालात के बीच प्रभावित कारोबारों को वित्तीय सहायता देने में मदद मिलेगी।

ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर

ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना ‘समुद्र मंथन’ के लिए वित्त वर्ष 2030-31 तक 84,084 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है।

कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देना और ऊर्जा के क्षेत्र में आयात निर्भरता कम करना है।

गोबरधन के तहत राष्ट्रीय सर्कुलर जैव ऊर्जा योजना के लिए 23,731 करोड़ रुपये का परिव्यय मंजूर किया गया है। इसका लक्ष्य कृषि, पशु और नगरपालिका से निकलने वाले जैविक कचरे से संपीड़ित बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देना है।

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के लिए 5,070 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं और ऊर्जा भंडारण को बढ़ावा देने की योजना है।

व्यापार और विदेशी निवेश के मोर्चे पर भी कदम

भारत ने व्यापार और निवेश के मोर्चे पर भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता यानी CETA और सामाजिक सुरक्षा समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू हुआ। इसके तहत यूके के बाजार में भारत के बड़ी संख्या में निर्यात को शुल्क संबंधी लाभ मिलने की उम्मीद है।

भारत और इजराइल के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौता भी 4 जुलाई 2026 से लागू हुआ। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच निवेश संबंधों के लिए अधिक सुरक्षित और पूर्वानुमानित ढांचा तैयार करना है।

सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश को बढ़ावा देने के लिए भी जून में कई सुधारों की घोषणा की गई। सरकार का उद्देश्य विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के साथ भारतीय ऋण बाजार में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना है।

कृषि क्षेत्र को भी समर्थन

कृषि क्षेत्र के लिए पीएम-किसान योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने के लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी वृद्धि की गई है। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य उपलब्ध कराना है।

कपास उत्पादकता मिशन ‘कपास क्रांति’ के लिए 2026-27 से 2030-31 तक 5,659.22 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य कपास उत्पादन में आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और बेहतर कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है।

दुनिया की नजर भारत की अर्थव्यवस्था पर

भारत की आर्थिक वृद्धि को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी समर्थन मिला है। जुलाई 2026 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करते हुए वैश्विक विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

भारत की संप्रभु रेटिंग भी अर्थव्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के भरोसे का एक संकेत है। अगस्त 2026 में S&P Global Ratings ने स्थिर आउटलुक के साथ भारत की ‘BBB/A-2’ सॉवरेन रेटिंग की पुष्टि की।

इससे पहले 2025 में 18 वर्षों के अंतराल के बाद भारत की दीर्घकालिक रेटिंग को ‘BBB’ तक बढ़ाया गया था।

नई और ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें — Drishti Now