कोयला की वजह से गहराता जा रहा है राज्य में बिजली संकट सोमबार को 1569 मेगावाट पावर ही किया गया दर्ज 1829 मेगावाट की थी मांग।

Ranchi News: झारखंड की खनन कमाई 9,746 करोड़ पार, कोयले ने अकेले जुटाया 4 हजार करोड़ से ज्यादा

Ranchi News: झारखंड की अर्थव्यवस्था में खनन की अहमियत एक बार फिर सामने आई है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 31 अगस्त तक राज्य सरकार को खनन गतिविधियों से 9,746 करोड़ रुपये की आय हुई है। खान एवं भूतत्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस राशि में खनिजों पर लगने वाले सेस के साथ रॉयल्टी और दूसरे शुल्क शामिल हैं।

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सरकार को मिले कुल राजस्व में 4,734.28 करोड़ रुपये खनिज सेस से आए हैं। इसके अलावा रॉयल्टी तथा अलग-अलग शुल्क और भुगतान के जरिए करीब 5,012 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा हुए हैं।

रॉयल्टी ने भी बढ़ाया सरकारी खजाना

खनन से मिली रकम में रॉयल्टी का हिस्सा सबसे बड़ा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, रॉयल्टी के रूप में सरकार को **4,338.87 करोड़ रुपये** मिले हैं।

इसके अलावा MMDR Act 2021 के तहत परमिट में अतिरिक्त राशि से **588.59 करोड़ रुपये** की प्राप्ति हुई। अपफ्रंट पेमेंट से 23.18 करोड़ और मैनेजमेंट फीस से 14.33 करोड़ रुपये आए।

पेनल्टी फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट, फाइनल प्राइस ऑफर, डीलर रजिस्ट्रेशन, डेड रेंट और दूसरे शुल्कों से भी सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिला है।

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सेस कलेक्शन में कोयला सबसे आगे

खनिज सेस के आंकड़ों पर नजर डालें तो कोयला झारखंड के लिए सबसे बड़ा कमाई का जरिया रहा है। 31 अगस्त तक कोयले से 4,017.47 करोड़ रुपये का सेस मिला।

लौह अयस्क ने 601.19 करोड़ रुपये का योगदान दिया। बॉक्साइट से 103.01 करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा यूरेनियम से 6.57 करोड़, कॉपर-लेड से 5.83 करोड़, सोना अयस्क से 20 लाख और ग्रेफाइट से करीब एक लाख रुपये का सेस संग्रह हुआ।

CCL से सबसे ज्यादा सेस

कोयला कंपनियों में CCL सबसे बड़ा योगदानकर्ता रही। कंपनी से राज्य सरकार को 1,660.89 करोड़ रुपये का सेस मिला।

इसके बाद BCCL से 648.31 करोड़, NTPC Mining से 517.55 करोड़ और ECL से 412.94 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। West Bengal Power Development Corporation ने 371.25 करोड़ रुपये का योगदान दिया।

Tata Steel से 164.35 करोड़, DVC Tubed Coal Mine से 139.62 करोड़ और Punjab State Power Corporation से 86.53 करोड़ रुपये का सेस मिला।

लौह अयस्क में SAIL और Tata Steel आगे

लौह अयस्क से मिलने वाले सेस में दो बड़ी कंपनियों का योगदान लगभग पूरे संग्रह पर भारी है। कुल 601.19 करोड़ रुपये में SAIL ने 311.20 करोड़ और Tata Steel ने 289.15 करोड़ रुपये जमा किए।

बॉक्साइट से मिले 103.01 करोड़ रुपये में Hindalco Industries का योगदान 69.04 करोड़ और M/S Minerals & Minerals का 32.99 करोड़ रुपये** रहा।

खनन राजस्व पर टिकी बड़ी हिस्सेदारी

आंकड़ों से यह तस्वीर साफ होती है कि झारखंड के सरकारी राजस्व में खनन क्षेत्र की भूमिका कितनी बड़ी है। खासकर कोयला खनन से मिलने वाला सेस राज्य के खजाने को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। वित्त वर्ष के अभी चार महीने ही पूरे हुए हैं, ऐसे में आने वाले महीनों में इस आंकड़े में और बढ़ोतरी की संभावना है।

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