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अमेरिका की बड़ी सैन्य तैनाती: 24 घंटे में 50 से अधिक F-22, F-35 और F-16 जेट मिडिल ईस्ट पहुंचे, ईरान पर हमले की आशंका बढ़ी

वाशिंगटन/तेहरान : ईरान के साथ न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत के बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अपनी सैन्य मौजूदगी को तेजी से बढ़ा दिया है। पिछले 24 घंटों में अमेरिकी सेना ने 50 से अधिक उन्नत फाइटर जेट इस क्षेत्र में भेजे हैं, जिसमें F-22 रैप्टर, F-35 लाइटनिंग II और F-16 फाइटिंग फाल्कन शामिल हैं।

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एक्सियोस (Axios) ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से इसकी पुष्टि की है। स्वतंत्र फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा और मिलिट्री एविएशन मॉनिटर्स ने दर्जनों जेट को क्षेत्र की ओर जाते हुए रिकॉर्ड किया है। इन जेट के साथ कई एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर (जैसे KC-135 और KC-46) भी तैनात किए गए हैं, जो लगातार ऑपरेशनल तैयारी का संकेत देते हैं।

अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि यह तैनाती बेहद तेज और बड़े पैमाने पर हुई है, जो पिछले कुछ दशकों में देखी गई सबसे बड़ी सैन्य बिल्डअप में से एक मानी जा रही है। ईरान के आसपास पहले से ही अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे USS अब्राहम लिंकन तैनात हैं, और अब दूसरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (USS Gerald R. Ford) भी क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब जेनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर डील पर अप्रत्यक्ष वार्ता जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दो सप्ताह का समय दिया है कि अगर डील नहीं हुई तो “बहुत दर्दनाक” परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिकी सैन्य बिल्डअप की आलोचना की है और इसे धमकी करार दिया है।

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका डिप्लोमेसी और मिलिट्री प्रेशर दोनों ट्रैक पर चल रहा है। अगर बातचीत विफल हुई तो ईरान पर संभावित हमले की आशंका बढ़ गई है।

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