सूर्या हांसदा एनकाउंटर में बाबुलाल मरांडी का बड़ा आरोप : हत्या JMM के ख़ास हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि के इशारे पर हुई , सीबीआई जांच की मांग,
सूर्या हांसदा एनकाउंटर में बाबुलाल मरांडी का बड़ा आरोप : हत्या JMM के ख़ास हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि के इशारे पर हुई , सीबीआई जांच की मांग,
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रांची, 24 अगस्त : झारखंड के गोड्डा जिले में 11 अगस्त को हुए सूर्या हांसदा एनकाउंटर मामले ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मामले को “सुनियोजित हत्या” करार देते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मरांडी ने मांग की है कि इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) या हाईकोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में हो।
सूर्या हांसदा की हत्या या एनकाउंटर?
मरांडी ने रांची में भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सूर्या हांसदा, जो ललमटिया के एक सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता थे, की हत्या सत्ताधारी दल, माफिया और पुलिस के गठजोड़ द्वारा की गई। उन्होंने दावा किया कि 11 जून 2025 को गोड्डा में झामुमो की एक सभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी विधायक प्रतिनिधि और झामुमो के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने सूर्या को खुलेआम धमकी दी थी। अगले ही दिन, 12 जून को उनके खिलाफ एक मुकदमा दर्ज किया गया, जिसे मरांडी ने साजिश का हिस्सा बताया।
मरांडी ने कहा, “सूर्या हांसदा कोई अपराधी नहीं थे। वे 400 अनाथ बच्चों की शिक्षा और भोजन की व्यवस्था करने वाले समाजसेवी थे। उनके खिलाफ दर्ज 24 मुकदमों में से 14 में वे बरी हो चुके थे, 5 में जमानत पर थे, और 5 में जमानत विचाराधीन थी।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिस 27 मई की घटना के आधार पर पुलिस ने सूर्या के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, उस दिन वे अपने बेटे का जन्मदिन मना रहे थे।
पुलिस की कहानी पर सवाल
मरांडी ने पुलिस के एनकाउंटर के दावे को फर्जी करार दिया। उन्होंने कहा कि सूर्या के शरीर पर तीन गोली के निशान थे, सभी पेट में, जो यह दर्शाता है कि वे भागने की कोशिश नहीं कर रहे थे। उन्होंने गिरफ्तारी के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन न होने और कोई मेडिकल टेस्ट न कराए जाने की भी आलोचना की।
भाजपा की जांच समिति की रिपोर्ट
मरांडी ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय जांच समिति ने इस मामले की गहन छानबीन की। समिति में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी, प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही, पूर्व सांसद सुनील सोरेन, पूर्व विधायक रणधीर सिंह, अमित मंडल और महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री अनीता सोरेन शामिल थे। समिति ने सूर्या के परिवार और स्थानीय लोगों से बातचीत के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि यह एनकाउंटर नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर संदेह
प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट संदिग्ध है और इसमें चोटों की स्पष्टता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सूर्या की मृत्यु पुलिस टॉर्चर से हुई और बाद में इसे एनकाउंटर का रूप दिया गया। शाही ने दोबारा पोस्टमार्टम और सीबीआई जांच की मांग की।
आदिवासी संगठनों का विरोध
सूर्या हांसदा की मृत्यु के बाद संथाल परगना में आदिवासी संगठनों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए। कई जगह कैंडल मार्च और बैठकों का आयोजन हुआ। संगठनों का आरोप है कि आदिवासी युवाओं को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।
सीआईडी जांच शुरू, लेकिन संशय बरकरार
हालांकि, झारखंड पुलिस ने इस मामले की जांच क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) को सौंप दी है, लेकिन भाजपा और सूर्या के परिजन इसे सही नही मानते हैं। मरांडी ने कहा, “सीआईडी राज्य सरकार के अधीन है, इसलिए निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।” उन्होंने और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने इस मामले को विधानसभा के मानसून सत्र और राज्यसभा में उठाने की बात कही।
राजनीतिक तापमान बढ़ा
यह मामला अब झारखंड की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। जेकेएलएम नेता जयराम महतो और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने भी सीबीआई जांच की मांग की है। चंपई सोरेन ने संथाल परगना में आदिवासियों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, झामुमो ने सूर्या को अपराधी बताते हुए पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया है।
भाजपा ने इस मुद्दे पर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि जब तक सूर्या हांसदा के परिवार को न्याय नहीं मिलता, वे चुप नहीं बैठेंगे। इस बीच, सीआईडी की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं, लेकिन परिजनों और विपक्ष की मांग है कि सच्चाई सामने लाने के लिए सीबीआई जांच अनिवार्य है।

















