सूर्या हांसदा एनकाउंटर मामले में आदिवासी संगठनों का आक्रोश मार्च, सीबीआई जांच की मांग
रांची : झारखंड के गोड्डा जिले में सामाजिक कार्यकर्ता और आदिवासी नेता सूर्य नारायण हांसदा उर्फ सूर्या हांसदा के कथित फर्जी एनकाउंटर को लेकर आदिवासी संगठनों ने शनिवार को रांची में आक्रोश मार्च निकाला। हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी शहीद चौक से राजभवन तक भारी बारिश के बीच मार्च में शामिल हुए और मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल संतोष गंगवार को ज्ञापन सौंपकर दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग उठाई।
आदिवासी संगठनों ने सूर्या हांसदा के एनकाउंटर को सुनियोजित हत्या करार दिया। संगठनों का आरोप है कि सूर्या हांसदा अवैध खनन माफियाओं और सरकारी साठगांठ के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, जिसके चलते उनकी हत्या की गई। केंद्रीय सरना समिति के महासचिव महादेव टोप्पो ने कहा, “सूर्या हांसदा आदिवासी समाज के हक, शिक्षा, और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे थे। उनकी हत्या एक साजिश के तहत की गई है।”
पुलिस के अनुसार, सूर्या हांसदा को 10 अगस्त 2025 को देवघर के नवाडीह गांव से गिरफ्तार किया गया था। अगले दिन, 11 अगस्त को बोआरीजोर थाना क्षेत्र के कमलडोर पहाड़ के पास कथित मुठभेड़ में उनकी मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि सूर्या ने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस पर गोली चलाई, जिसके जवाब में उन्हें गोली मारी गई। हालांकि, सूर्या के परिजनों और स्थानीय लोगों ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताया। सूर्या की मां और पत्नी ने कहा कि उनकी तबीयत खराब थी और वह भागने की स्थिति में नहीं थे।
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जेकेएलएम ने भी इस मामले को फर्जी एनकाउंटर करार देते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में एक सात सदस्यीय जांच टीम गठित की, जिसने 17 अगस्त को सूर्या के गांव डकैता, ललमटिया का दौरा किया। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा, “यह जन सरोकार की आवाज को दबाने की साजिश है। हाईकोर्ट के सिटिंग जज या सीबीआई से जांच होनी चाहिए।” जेकेएलएम विधायक जयराम महतो ने भी इसे सुनियोजित हत्या बताया।



















