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जापान में रिकॉर्ड 29 करोड़ रुपये में बिकी ब्लूफिन टूना मछली: क्या है इसमें खास और क्यों है पकड़ना मुश्किल?

टोक्यो : जापान की राजधानी टोक्यो के मशहूर टोयोसु फिश मार्केट में नए साल की पहली नीलामी में एक 243 किलोग्राम की ब्लूफिन टूना मछली रिकॉर्ड 510.3 मिलियन जापानी येन (लगभग 29 करोड़ भारतीय रुपये) में बिकी। यह दुनिया की सबसे महंगी मछली बन गई है। इस मछली को खरीदने वाले जापान की मशहूर सुशी चेन कियोमुरा कॉर्प के मालिक कियोशी किमुरा हैं, जिन्हें ‘टूना किंग’ के नाम से जाना जाता है। इस नीलामी ने एक बार फिर ब्लूफिन टूना की दुर्लभता और मूल्य को दुनिया के सामने ला दिया।

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ब्लूफिन टूना में क्या है खास?

ब्लूफिन टूना (Thunnus thynnus) अटलांटिक और पैसिफिक महासागरों में पाई जाने वाली टूना मछलियों की सबसे बड़ी प्रजाति है। यह मछली 13 फीट तक लंबी और 2,000 पाउंड (लगभग 900 किलोग्राम) तक भारी हो सकती है। इसकी खासियतें इसे दुनिया की सबसे मूल्यवान मछलियों में से एक बनाती हैं:

स्वाद और उपयोग:

ब्लूफिन टूना का मांस बेहद कोमल, तेलयुक्त और स्वादिष्ट होता है, जो जापानी व्यंजनों जैसे सुशी और साशिमी के लिए आदर्श है। जापान में पकड़ी जाने वाली 80% ब्लूफिन टूना का इस्तेमाल यहीं होता है। इसका फैटी कंटेंट इसे ‘टोरो’ नामक प्रीमियम सुशी बनाने के लिए परफेक्ट बनाता है

शारीरिक विशेषताएं: 

यह मछली वार्म-ब्लडेड होती है, यानी यह अपने शरीर का तापमान बनाए रख सकती है, जो इसे ठंडे पानी में भी तेज तैराक बनाती है। यह हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर माइग्रेट करती है, जैसे अटलांटिक से भूमध्य सागर तक। इसकी रफ्तार 40 मील प्रति घंटा तक हो सकती है।

दुर्लभता और पर्यावरणीय महत्व:

ओवरफिशिंग की वजह से ब्लूफिन टूना की आबादी तेजी से घट रही है, जिससे यह IUCN की रेड लिस्ट में ‘वुल्नरेबल’ कैटेगरी में है। इसकी दुर्लभता ही इसे इतना महंगा बनाती है। जापान में नीलामी में ऊंची कीमतें सांस्कृतिक महत्व और नए साल की परंपरा का हिस्सा हैं, जहां खरीदार इसे शुभ मानते हैं।

इसे जाल लगाकर क्यों नहीं पकड़ सकते?

ब्लूफिन टूना को पकड़ना आसान नहीं है, और पारंपरिक जाल (नेट) से इसे पकड़ना चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि, इसे पूरी तरह से जाल से नहीं पकड़ा जा सकता ऐसा नहीं है, लेकिन कई वजहों से स्पेशलाइज्ड तरीके अपनाए जाते हैं:

पकड़ने के तरीके:

ब्लूफिन टूना मुख्य रूप से पर्स सीन नेट्स (बड़े घेरने वाले जाल) से पकड़ी जाती है, जहां जहाज मछलियों के झुंड को घेरते हैं और फिर जाल कसते हैं। इसके अलावा, हुक एंड लाइन (हैंडलाइन, लॉन्गलाइन), ट्रॉलिंग और ट्रैप्स (जैसे अलमाड्राबा, एक प्राचीन फिनिशियन तरीका) का इस्तेमाल होता है। अलमाड्राबा में तटीय इलाकों में फिक्स्ड नेट्स का जाल बनाया जाता है, जो सस्टेनेबल है और केवल बड़ी मछलियों को पकड़ता है, जबकि छोटी को छोड़ देता है।

क्यों नहीं साधारण जाल से?

ब्लूफिन टूना बेहद तेज और शक्तिशाली तैराक है, जो साधारण जालों को तोड़ सकती है या उनसे बच सकती है। गिलनेट्स (जाल जो मछली के गलफड़ों में फंसाते हैं) से बायकैच (अनचाही मछलियां या जानवर पकड़ना) का खतरा ज्यादा होता है, जैसे शार्क या कछुए। ओवरफिशिंग को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियम (जैसे ICCAT) सख्त हैं, जो कुछ इलाकों में नेट फिशिंग पर प्रतिबंध लगाते हैं। इसके बजाय, सस्टेनेबल मेथड्स जैसे पोल एंड लाइन को प्रोत्साहित किया जाता है, जहां एक-एक मछली को हुक से पकड़ा जाता है।

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