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बाबूलाल ने लिखा मुख्यमंत्री (cm) को पत्र साहेबगंज में पुलिस जनजातीय समुदाय को बेवजह थाने में भूखे प्यासे बैठाती है।

साहिबगंज  : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री (cm) बाबूलाल मरांडी इन दिनों ट्विटर पर काफी व्यस्त वह भी तब जब मामला साहिबगंज का हो दरअसल साहिबगंज मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र बरहेट से जुड़ा है और बजट का कोई भी मामला बाबूलाल मरांडी इन दिनों हाथों हाथ लपक ले रहे हैं तभी तो एक मामला सामने आया है जिसमें एक जनजातीय समाज के काशीराम ने आरोप लगाया है कि उन्हें पंचायत चुनाव में धमकी मिल रही है और पुलिस घंटों थाने में उन्हें भूखे प्यासे बैठे रखती है इस मामले को बाबूलाल मरांडी ने रखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को चिट्ठी लिखते हुए लिखा है कि मामला काफी गंभीर है और डीजीपी दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करें और वहां अपनी निगरानी में चुनाव करवाएं । लेकिन बाबूलाल ने जिस कांशीराम के पत्र को लेकर पंकज मिश्रा पर आरोप लगाया है उस पत्र में कहीं भी पंकज मिश्रा का नाम नहीं है

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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने ट्विटर पर लिखा है कि उन्हें शिकायत मिली है कि साहेबगंज के धर्मपुर पंचायत में मुखिया के चुनाव में माफिया और पुलिस का गठजोड़ धमकी के बल पर चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है. मुख्यमंत्री के इस कार्यक्षेत्र में उनका प्रतिनिधि पंकज मिश्रा खुलेआम वहां पुलिस संरक्षण में बैठक कर धमकी दे रहा है. वहां की पुलिस जनजातीय समाज के कांशीराम कर्माकर को बिना कारण के थाने में बुलाकर प्रताड़ित कर एक खास उम्मीदवार के पक्ष में काम कर रही है. मामला मुख्यमंत्री के कार्यक्षेत्र का है, इसलिए झारखंड पुलिस के डीजीपी इस मामले को खुद देखें और वहां निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करायें. साथ ही दोषी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई करें.

पीड़ित ने बाबूलाल को लिखे पत्र में कहीं भी पंकज मिश्रा का जिक्र नहीं किया है
बाबूलाल मरांडी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर कांशीराम का पत्र भी पोस्ट किया है. जिसमें कांशीराम ने कहा है कि रांगा थाना प्रभारी अमन कुमार सिंह तोमर के बुलावे पर 2 मई को सुबह 6 बजे थाने में हाजिर हुआ. कांशीराम ने आरोप लगाया कि थानेदार ने उसे बेवजह 7 घंटे भूखे-प्यासे थाने में बैठाये रखा, जबकि उसके खिलाफ कोई मामला या अरेस्ट वारंट नहीं था. थानेदार का कहना था कि एसडीपीओ आएंगे तब थाने से छोड़ा जाएगा, लेकिन दोपहर 12 बजे तक कोई पदाधिकारी थाने में नहीं पहुंचा तो वह वहां से निकलकर वापस अपने घर आ गया. कांशीराम ने आशंका जताई है कि स्थानीय राजनीति से ग्रसित होकर उसे झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजा जा सकता है.

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