कांग्रेस का चाल, चरित्र और चेहरा पिछड़ा विरोधी: आदित्य साहू
रांची: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश महामंत्री और सांसद आदित्य साहू ने कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आदित्य साहू ने कहा कि कांग्रेस पार्टी एक बार फिर पिछड़ा समाज के हितैषी बनने का ढोंग कर रही है, जबकि उसका चाल, चरित्र और चेहरा पूरी तरह पिछड़ा विरोधी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछड़ों का विरोध कांग्रेस के डीएनए में शामिल है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!आदित्य साहू ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा नहीं दिया और मंडल कमीशन की रिपोर्ट को वर्षों तक ठंडे बस्ते में रखा। इस रिपोर्ट को लागू करने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार को जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने एक परिवार को महिमामंडन करने के लिए कई विद्वान और जनाधार वाले पिछड़े नेताओं को बार-बार अपमानित किया।
आदित्य साहू ने कांग्रेस समर्थित हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस सरकार ने पंचायत चुनाव बिना पिछड़ा समाज के लिए आरक्षण के कराए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी पिछड़ों के आरक्षण को मुस्लिम समाज के लिए आरक्षित करने की कोशिश कर रही है, जो उनकी असल नियत को दर्शाता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखंड सरकार ने अभी तक ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी नहीं की, जो पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने की पहली संवैधानिक आवश्यकता है। साहू ने यह भी याद दिलाया कि बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व वाली सरकार, जिसमें प्रदीप यादव स्वयं शामिल थे, ने पिछड़ों के लिए आरक्षण बढ़ाने की कोशिश की थी, लेकिन कोर्ट के निर्देशों के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका।
साहू ने कहा कि भाजपा सरकार पिछड़ा समाज के कल्याण के लिए समर्पित है। उन्होंने गर्व के साथ उल्लेख किया कि पिछले 11 वर्षों से एक गरीब पिछड़ा वर्ग का बेटा, नरेंद्र मोदी, देश का लोकप्रिय प्रधानमंत्री है। उनकी सरकार में दर्जनों पिछड़े वर्ग के मंत्री हैं, और पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा भी मोदी सरकार ने ही प्रदान किया।
उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि वह वास्तव में पिछड़ों की हितैषी है, तो आगामी नगर निकाय चुनावों में पिछड़ा वर्ग के लिए 27% आरक्षण सुनिश्चित करे। साहू ने कहा कि केवल बयानबाजी से पिछड़ा समाज का कल्याण नहीं होगा, बल्कि इसे धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार की है।

















