गढ़वा( Garhwa) ।12 साल बाद खेत में चला हल, खत्म हुआ जमीन का विवाद
बीडीओ प्रवीण कुमार सिंह की पहल से बरछाबांध में लौटी खुशियां, फिर जुड़े बिछड़े परिवारों के रिश्ते
गढ़वा ( Garhwa)। बारह वर्षों से जमीन के विवाद में उलझे परिवारों के लिए आखिरकार वह दिन आ ही गया, जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार था। बरछाबांध गांव में विवादित जमीन पर जब 12 साल बाद हल चला, तो खेतों में सिर्फ मिट्टी ही नहीं पलटी, बल्कि वर्षों से जमी रिश्तों की कड़वाहट भी दूर होती नजर आई। महिलाओं के पारंपरिक लोकगीतों और पूजा-अर्चना के बीच खेती की शुरुआत हुई तो पूरा माहौल भावुक हो उठा। ग्रामीणों ने इसे 12 वर्षों के वनवास की समाप्ति बताते हुए बीडीओ सह अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह की पहल की सराहना की। गढ़वा जिले के बरडीहा प्रखंड स्थित बरछाबांध गांव में भूमि विवाद के समाधान के बाद खेती शुरू करने का यह अवसर ग्रामीणों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं था। इस खास मौके पर बीडीओ प्रवीण कुमार सिंह स्वयं ग्रामीणों के बीच पहुंचे। बताया गया कि वे अपने आवास से करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर गांव पहुंचे। ग्रामीणों के साथ बैठक कर विवाद के समाधान के बाद सभी महिला-पुरुष पारंपरिक उत्साह के साथ खेत की ओर रवाना हुए। खेत में हल चलाने के लिए तीन जोड़ी बैलों की व्यवस्था की गई थी।

पूजा-अर्चना के बाद खेत में उतरे बैल, गूंजे लोकगीत
खेत पहुंचीं महिलाओं के हाथों में नारियल, थाल, सिंदूर और पूजा की सामग्री थी। वर्षों से विवाद के कारण जिस जमीन पर खेती नहीं हो पा रही थी, वहां पहले पारंपरिक रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद नारियल फोड़कर खेती की शुरुआत की गई। जैसे ही बैलों ने खेत में हल खींचना शुरू किया, महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीत गाकर अपनी खुशी जाहिर की। यह दृश्य उन परिवारों के लिए बेहद भावुक करने वाला था, जिन्होंने जमीन के विवाद के कारण वर्षों तक परेशानी झेली। खेत में हल चलने के साथ ही गांव में उम्मीद की नई फसल लहलहाने लगी। ग्रामीणों के चेहरों पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी।
12 वर्षों का वनवास खत्म, परिवारों में लौटा मेल-मिलाप
ग्रामीण महिलाओं ने भावुक होते हुए कहा कि आज उनके 12 वर्षों का वनवास समाप्त हुआ है। लंबे समय से विवाद के कारण जमीन पर खेती नहीं हो पा रही थी और परिवारों के बीच भी दूरियां बढ़ गई थीं। अब विवाद खत्म होने से न केवल खेती का रास्ता खुला है, बल्कि बिछड़े भाइयों और परिवारों के बीच मेल-मिलाप की उम्मीद भी मजबूत हुई है।
महिलाओं ने कहा कि जब कोई पदाधिकारी जनता की समस्याओं को समझते हुए उनके बीच पहुंचता है और समाधान की पहल करता है, तो उसका असर कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर लोगों के जीवन में दिखाई देता है। ग्रामीणों ने प्रवीण कुमार सिंह की पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि आपसी विवादों का समाधान होने से परिवारों और समाज में शांति का माहौल बनता है।
बातचीत से सुलझाएं विवाद, अदालतों के चक्कर से बचें : बीडीओ
इस अवसर पर बीडीओ सह सीओ प्रवीण कुमार सिंह ने ग्रामीणों से आपसी विवादों को बातचीत और सहमति से सुलझाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भूमि विवादों के कारण लोगों की मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा मुकदमेबाजी में खर्च हो जाता है। वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने से समय, पैसा और पारिवारिक संबंधों को नुकसान पहुंचता है।उन्होंने कहा कि छोटे-मोटे विवादों को आपसी बातचीत से सुलझाने का प्रयास करना चाहिए। जहां जरूरत हो, वहां संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की मदद लेकर समाधान का रास्ता निकालना चाहिए। बरछाबांध में 12 साल बाद खेत पर चला हल इस बात का संदेश दे गया कि आपसी समझदारी, संवाद और सकारात्मक पहल से वर्षों पुरानी दूरियां भी मिटाई जा सकती हैं। खेत में गूंजते लोकगीत और बैलों के कदमों की आहट ने ग्रामीणों को नई शुरुआत का एहसास कराया। अब उम्मीद है कि जिस जमीन पर वर्षों तक विवाद का साया रहा, वहां फिर से फसल लहलहाएगी और परिवारों के रिश्तों में भी खुशहाली लौटेगी।

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