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एक तस्वीर ने झारखंड के सियासी गलियों में नई बहस छेड़ दी , राजनीति में कोई किसी का स्थायी दुश्मन नही होता।

एक तस्वीर ने झारखंड के सियासी गलियों में नई बहस छेड़ दी , राजनीति में कोई किसी का स्थायी दुश्मन नही होता।

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झारखंड की राजनीति में अक्सर ‘अनहोनी’ को ‘होनी’ में बदलते देखा गया है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा बीजेपी के कद्दावर नेता और विधायक सी.पी. सिंह को पगड़ी पहनाने की तस्वीर ने राज्य के सियासी तापमान को अचानक बढ़ा दिया है।
सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक अब एक ही सवाल तैर रहा है— क्या यह सिर्फ शिष्टाचार है या आने वाले किसी बड़े सियासी बदलाव की पटकथा है।

हेमंत सोरेन का सी.पी. सिंह जैसे कट्टर बीजेपी चेहरे को अपने हाथों से पगड़ी पहनाना, विपक्ष के प्रति ‘नरम रुख’ का संकेत माना जा रहा है। चर्चा है कि वर्तमान गठबंधन के भीतर कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं, जिसका फायदा उठाकर पुरानी दोस्ती फिर से परवान चढ़ सकती है।

झारखंड पहले भी JMM और BJP के गठबंधन वाली सरकार देख चुका है। ऐसे में महाशिवरात्रि के मंच पर मुख्यमंत्री और बीजेपी विधायक की यह नजदीकी इशारा कर रही है कि राजनीति में ‘न कोई स्थाई दोस्त होता है और न दुश्मन’।

झारखंड में जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन के भीतर असंतोष पिछले कुछ दिनों से खुलकर सामने आने लगा है। कांग्रेस के दो पूर्व विधायकों और नेताओं ने अपनी ही गठबंधन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

कांग्रेस नेता अंबा प्रसाद ने हेमंत सोरेन सरकार पर बड़कागांव में रैयतों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर अपने ही वोट बैंक को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार की कार्रवाई से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ी है और इससे कांग्रेस के जनाधार पर असर पड़ सकता है। विशेष रूप से हजारीबाग के गोंदलपुरा में अडाणी के कोल ब्लॉक को लेकर हुई जनसुनवाई के दौरान झड़प और उसके बाद दर्ज एफआईआर को उन्होंने मुद्दा बनाते हुए मुख्यमंत्री के गृह विभाग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

इधर पलामू के कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने गठबंधन की स्थिति को लेकर और भी तीखा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि आने वाले 20 से 25 दिनों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बीजेपी के साथ हाथ मिला सकते हैं और नई सरकार बना सकते हैं। त्रिपाठी के इस बयान ने सियासी गलियारों में अटकलों को और हवा दे दी है।

फिलहाल इस बयानबाजी ने झारखंड की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में गठबंधन की स्थिरता को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है। बहरहाल सबकी निगाहें नगर निकाय चुनाव पर टिकी हुई है।

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