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भारत-चीन संबंधों में सुधार, लेकिन अमेरिकी टैरिफ नहीं है वजह: जयशंकर

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार एक लंबी और विचारशील प्रक्रिया का परिणाम है, न कि अमेरिकी टैरिफ या ट्रेड डील विवाद का तात्कालिक प्रभाव। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को बेहतर बनाने की दिशा में सतत प्रयास हो रहे हैं, और इसे किसी एक घटना से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।

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जयशंकर का यह बयान उन अटकलों के जवाब में आया है, जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ के कारण नई दिल्ली और बीजिंग के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत-चीन संबंधों में सुधार का आधार आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और पारस्परिक हितों पर टिका है।

हाल ही में, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने नई दिल्ली का दौरा किया और विदेश मंत्री जयशंकर के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वांग यी की यात्रा के दौरान सीमा विवाद, आर्थिक सहयोग, और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस महीने के अंत में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के लिए चीन की यात्रा करने वाले हैं, जहां उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात की संभावना है। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और सहयोग को और मजबूत करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

जयशंकर ने कहा, “हमारे संबंधों ने 2020 की गलवान घाटी घटना के बाद एक कठिन दौर देखा है, लेकिन अब हम एक रचनात्मक और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सीमा पर शांति और स्थिरता हमारे संबंधों की नींव है।”

इसके साथ ही, दोनों देशों ने सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने, सीधी उड़ानें बहाल करने और पर्यटक वीजा जारी करने जैसे कदमों पर सहमति जताई है। चीनी विदेश मंत्री ने भी भारत के साथ साझेदारी को बढ़ावा देने और एकतरफा दबाव के खिलाफ मिलकर काम करने की बात कही।

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