सिमडेगा में इंटरनेट सेवा संघर्ष मोर्चा की जन आक्रोश सभा संपन्न, ग्रामीणों ने उठाई डिजिटल अधिकार की मांग
सिमडेगा : ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट सेवाओं की बदहाली को लेकर आज सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड अंतर्गत ताराबोगा स्थित संत अन्ना स्कूल मैदान में “इंटरनेट सेवा संघर्ष मोर्चा” के बैनर तले एक विशाल जन आक्रोश सभा आयोजित की गई। सभा में भारी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और इंटरनेट सेवाओं की खराब स्थिति पर प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग की।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!“इंटरनेट अब विलासिता नहीं, जीवन की अनिवार्य डोर”- अमृत चिराग तिर्की
सभा की अध्यक्षता करते हुए भारत आदिवासी पार्टी के जिलाध्यक्ष एवं मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य अमृत चिराग तिर्की ने कहा कि “इंटरनेट सेवा आज कोई विलासिता नहीं, बल्कि जीवन की वह अनिवार्य डोर है जो शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, प्रशासनिक पारदर्शिता और जनकल्याण के हर पहलू को जोड़ती है। लेकिन दुर्भाग्य है कि हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग नेटवर्क की एक किरण के लिए छत पर चढ़ने को मजबूर हैं।” उन्होंने कहा कि यह सिर्फ तकनीकी कमी नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के सपनों और अधिकारों पर चोट है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और योजनाओं पर असर
सभा में फ़ादर जोसेफ समद, प्रधानाध्यापक (संत इग्निस उच्च विद्यालय, सलांगपोस) ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच की कमी से बच्चों की शिक्षा और युवाओं के अवसर बाधित हो रहे हैं। मुखिया बलदेव सिंह (ताराबोगा) ने कहा कि नेटवर्क की कमी से गांवों में सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। अधिवक्ता जॉन कुल्लू ने इसे “मौलिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा” बताते हुए कहा कि ज़रूरत पड़ी तो न्यायालय का दरवाज़ा भी खटखटाया जाएगा।
“डिजिटल इंडिया का सपना अधूरा”
पीडीएस संचालक नितेश कुमार ने बताया कि नेटवर्क बाधा के कारण राशन वितरण जैसी ई-सेवाएं प्रभावित हैं। इशाक डुंगडुंग (पंचायत समिति सदस्य) ने कहा कि पंचायत स्तरीय विकास कार्य अब इंटरनेट पर निर्भर हैं, लेकिन नेटवर्क की कमी से कार्य ठप हैं। सिस्टर पुष्पा खेस (प्रधानाध्यापिका, संत अन्ना उच्च विद्यालय, ताराबोगा) ने कहा कि ग्रामीण बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा अब एक “सपना” बनकर रह गई है।
सीएससी केंद्र संचालक वाशिम अकरम ने कहा कि आधार अपडेट, बिल भुगतान, पेंशन जैसी सेवाएं ठप हैं। सामाजिक कार्यकर्ता शीत कुमार बड़ाईक ने कहा कि “डिजिटल असमानता नई सामाजिक खाई पैदा कर रही है यह अस्वीकार्य है और इसे बदलना ही होगा।”
3 नवंबर को उपायुक्त को सौंपा जाएगा ज्ञापन
मोर्चा ने घोषणा की कि 3 नवंबर 2025 को एक प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त सिमडेगा से मिलकर ज्ञापन सौंपेगा। प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहेंगे अमृत चिराग तिर्की, बलदेव सिंह, जॉन कुल्लू, नितेश कुमार, इशाक डुंगडुंग, शीत कुमार बड़ाईक, कमला देवी, सिस्टर पुष्पा खेस, रंजिता केरकेट्टा, वाशिम अकरम और जेरोम टेटे।
मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाता, तो आंदोलन को जिला स्तर से राज्यव्यापी स्तर तक विस्तारित किया जाएगा। सभा में सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति ने यह संदेश स्पष्ट किया कि अब ग्रामीण जनता अपने डिजिटल अधिकारों को लेकर सजग और संघर्षशील है।
















