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रूस में पुतिन से मिले जयशंकर, टैरिफ वॉर के बीच अमेरिका को दिया स्पष्ट संदेश

मॉस्को: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रूस की अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान गुरुवार (21 अगस्त, 2025) को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने रूस से तेल आयात करने को लेकर भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू किया है। जयशंकर ने इस दौरे के दौरान अमेरिका की टैरिफ नीति पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी को किसी दबाव में नहीं बदलेगा।

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भारत-रूस संबंधों की मजबूती पर जोर

जयशंकर ने मॉस्को में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ भी चर्चा की। उन्होंने भारत-रूस संबंधों को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से दुनिया की सबसे स्थिर और मजबूत साझेदारियों में से एक बताया। संयुक्त प्रेस वार्ता में जयशंकर ने कहा, “भारत और रूस के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भू-राजनीतिक परिस्थितियों, जन भावनाओं और नेतृत्व स्तर पर आपसी संपर्क से मजबूत हैं।”

अमेरिकी टैरिफ पर करारा जवाब

अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ (जिसमें 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क शामिल है) पर जयशंकर ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “भारत रूस का सबसे बड़ा तेल आयातक नहीं है, यह स्थान चीन के पास है। न ही हम एलएनजी के सबसे बड़े खरीदार हैं, यह यूरोपीय संघ है।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका ने ही भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता के लिए रूस से तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया था। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत अमेरिका से भी तेल आयात करता है और इसकी मात्रा बढ़ रही है, ऐसे में अमेरिका का टैरिफ तर्क आधारहीन है।ल

द्विपक्षीय व्यापार और भविष्य की योजनाएं

जयशंकर ने रूस के साथ द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित और टिकाऊ बनाने पर जोर दिया। उन्होंने व्यापार घाटे को कम करने के लिए रूस से भारत में निवेश और आयात बढ़ाने का आग्रह किया। 2021 में 13 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में भारत-रूस व्यापार 68 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, लेकिन व्यापार घाटा 59 अरब डॉलर तक बढ़ गया है। जयशंकर ने भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) की 26वीं बैठक में मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रगति की सराहना की।

पुतिन की भारत यात्रा की तैयारियां

मुलाकात के दौरान जयशंकर ने राष्ट्रपति पुतिन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस साल के अंत में होने वाले 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन की भारत यात्रा की तैयारियों पर भी चर्चा की। रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने कहा कि दोनों देश इस शिखर सम्मेलन के लिए “ठोस दस्तावेजों का पैकेज” तैयार कर रहे हैं।

जयशंकर की यह यात्रा भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और रूस के साथ दशकों पुरानी दोस्ती को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा अमेरिका को यह संदेश देता है कि भारत अपनी रणनीतिक साझेदारियों पर किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। रूस के साथ ऊर्जा, रक्षा, और व्यापार सहयोग को और गहरा करने की भारत की प्रतिबद्धता इस दौरे से स्पष्ट होती है।

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