पीएम मोदी की रूस के राष्ट्रपति पुतिन से फोन पर बात, भारत आने का न्योता, यूक्रेन संघर्ष और टैरिफ पर चर्चा

पीएम मोदी की रूस के राष्ट्रपति पुतिन से फोन पर बात, भारत आने का न्योता, यूक्रेन संघर्ष और टैरिफ पर चर्चा

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ टेलीफोन पर विस्तृत बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-रूस विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने, यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान और हाल के अमेरिकी टैरिफ के प्रभावों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने का न्योता भी दिया।

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बातचीत में पीएम मोदी ने यूक्रेन संघर्ष पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा कि युद्ध का समाधान युद्धक्षेत्र में नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए संभव है। उन्होंने कहा, “हम रूस-यूक्रेन संघर्ष के सभी पक्षों के साथ निरंतर संपर्क में हैं। भारत शांति और स्थिरता की त्वरित स्थापना का समर्थन करता है और इसके लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है।”

यह बातचीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल आयात करने के लिए भारत पर 50% टैरिफ (25% प्रारंभिक और 25% अतिरिक्त) लगाया है, जो 27 अगस्त से प्रभावी होगा। ट्रंप ने इसे रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस की आर्थिक मदद करने का आरोप लगाते हुए “सेकेंडरी सैंक्शंस” का हिस्सा बताया। जवाब में, पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत रूस से तेल आयात जारी रखेगा, क्योंकि यह 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका स्वयं रूस से कई सामानों का आयात-निर्यात करता है, जिसे भारत दोहरे मापदंड के रूप में देखता है।

बातचीत में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की, जिसमें रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्र शामिल रहे। पीएम मोदी ने कहा, “भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी गहरी दोस्ती और आपसी विश्वास पर आधारित है।” उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन को इस वर्ष के अंत में भारत में होने वाले 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया, जिसे पुतिन ने स्वीकार कर लिया।

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के टैरिफ युद्ध ने भारत, रूस और चीन को एकजुट होने के लिए प्रेरित किया है। भारत ने रूस से रियायती दरों पर तेल आयात करके अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया है, जिससे 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 60 अरब डॉलर से अधिक हो गया। पीएम मोदी की कूटनीति न केवल भारत-रूस संबंधों को मजबूत कर रही है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत को एक स्वतंत्र और संतुलित शक्ति के रूप में स्थापित कर रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल ने हाल ही में मॉस्को में कहा था कि भारत पुतिन के आगामी दौरे को लेकर “उत्साहित और प्रसन्न” है। यह दौरा, जो 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन का पहला भारत दौरा होगा, दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

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