झारखंड में बच्चा चोरी की अफवाहों ने मचा रखा है कोहराम: 5 दिनों में 12 से ज्यादा घटनाएं, एक निर्दोष की मौत, कई घायल
रांची : झारखंड में बच्चा चोरी और अपहरण की अफवाहें सोशल मीडिया, खासकर व्हाट्सएप पर तेजी से फैल रही हैं, जिसके चलते राज्य के विभिन्न जिलों में भीड़ द्वारा निर्दोष लोगों पर हमले की घटनाएं बढ़ गई हैं। बीते पांच दिनों में ही 12 से अधिक ऐसी वारदातें सामने आई हैं, जिनमें शक के आधार पर लोगों को पीटा गया। एक मामले में तो निर्दोष व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ताजा मामला राजधानी रांची के एदलहातु इलाके से सामने आया है। गुरुवार को दो महिलाओं और एक पुरुष को ऑटो में एक बच्चे के साथ जाते देख किसी ने बच्चा चोरी का शोर मचा दिया। बच्चे के रोने की वजह से अफवाह फैल गई और भीड़ ने ऑटो रोककर तीनों को घेर लिया। बिना किसी पुष्टि के मारपीट शुरू कर दी गई। सूचना मिलते ही बरियातू थाना प्रभारी मनोज कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और तीनों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रारंभिक जांच में किसी संगठित बच्चा चोरी गिरोह की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच जारी है।
अन्य जिलों में भीषण हिंसा
चतरा जिले के पिपरवार में तीन दिन पहले बच्चा चोरी के शक में एक मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को पीट-पीटकर मार डाला गया। बाद में पता चला कि वह निर्दोष था और उसकी मौत अस्पताल में हो गई। धनबाद जिले के बाघमारा थाना क्षेत्र में बुधवार को दो महिलाओं पर भीड़ ने हमला किया, पुलिस ने समय रहते बचाया।
बोकारो में 16 फरवरी को छह महिलाओं को बच्चा चोर गिरोह से जुड़े होने के आरोप में पीटा गया, पुलिस हस्तक्षेप से उनकी जान बची। वहीं जमशेदपुर, जामताड़ा, गिरिडीह, रामगढ़, लातेहार और अन्य जिलों में भी इसी तरह की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जहां महिलाओं और पुरुषों को संदेह के आधार पर निशाना बनाया गया।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि राज्य में किसी संगठित बच्चा चोरी गिरोह के सक्रिय होने का कोई ठोस सबूत नहीं है। ये ज्यादातर अफवाहें व्हाट्सएप फॉरवर्ड मैसेज से फैल रही हैं, जो लोगों में दहशत पैदा कर रही हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर यकीन न करें, किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचित करें और खुद न्याय न करें।
ऐसी घटनाएं न सिर्फ निर्दोषों की जान ले रही हैं, बल्कि समाज में भय का माहौल भी बना रही हैं। पुलिस ने कई मामलों में हस्तक्षेप कर लोगों को बचाया है, लेकिन अफवाहों पर लगाम लगाना जरूरी है।

















