झारखंड कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक आज: सारंडा वन्य अभयारण्य के गठन पर सौंपी जा सकती है रिपोर्ट , नगर निकाय चुनाव पर भी चर्चा संभावित

रांची : झारखंड सरकार की कैबिनेट बैठक मंगलवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित हो रही है। यह बैठक मूल रूप से 16 अक्टूबर को निर्धारित थी, लेकिन अब इसे 14 अक्टूबर को ही बुलाया गया है। बैठक झारखंड मंत्रालय (प्रोजेक्ट भवन) के मंत्रिपरिषद कक्ष में अपराह्न 3 बजे से शुरू होगी। इस बैठक में पर्यावरण, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय निकाय चुनाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसले लिए जाने की पूरी संभावना है।

बैठक का सबसे प्रमुख एजेंडा पश्चिमी सिंहभूम जिले के प्रसिद्ध सारंडा वन क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य (वाइल्डलाइफ सेंचुरी) घोषित करने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुपालन में राज्य सरकार ने पहले ही इस मुद्दे पर विचार करने के लिए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) का गठन किया था। इस समूह में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह, वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर, श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव और कल्याण मंत्री चमड़ा लिंडा शामिल हैं। यह समूह 30 सितंबर को सारंडा का दौरा कर चुका है और आज अपनी विस्तृत रिपोर्ट कैबिनेट को सौंपेगा।

रिपोर्ट में 575.19 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को संरक्षित करने का प्रस्ताव है, जिसमें अंकुआ, समता, करमपदा, गूदलीबाग, त्रिकोशी और थलकुवाद जैसे गांव शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 8 अक्टूबर को झारखंड सरकार को 7 दिनों के भीतर (यानी 15 अक्टूबर तक) अंतिम निर्णय लेने का आदेश दिया है, वरना अदालत स्वयं रिट ऑफ मैंडमस जारी कर सकती है। रिपोर्ट पर चर्चा के बाद कैबिनेट सारंडा को राज्य का 10वां वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने पर मुहर लगा सकती है। यह क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है और यहां लुप्तप्राय प्रजातियों जैसे उड़ने वाली छिपकली सहित 40 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं।

हालांकि, खनन कंपनियों ने चिंता जताई है कि अभयारण्य घोषणा से खनन गतिविधियां प्रभावित होंगी, जिससे राज्य को राजस्व हानि हो सकती है। लेकिन वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत स्थानीय ग्रामीणों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।

कैबिनेट बैठक में 48 नगर निकायों के चुनाव से जुड़े प्रस्ताव पर भी चर्चा होने की संभावना है। पिछड़ा वर्ग आयोग ने ओबीसी आरक्षण के लिए आवश्यक ‘ट्रिपल टेस्ट’ (जनसंख्या, प्रतिनिधित्व और दक्षता जांच) की रिपोर्ट नगर विकास विभाग को सौंप दी है। आयोग के अध्यक्ष ने हाल ही में धनबाद दौरे के दौरान कहा था कि 2025 में ही चुनाव कराने की तैयारी जोरों पर है। झारखंड हाईकोर्ट ने पहले ही चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं, जबकि केंद्र सरकार ने अनुदान (लगभग 1600 करोड़ रुपये) रोक रखा है। चुनाव होने से नगरीय विकास कार्यों में तेजी आएगी।

बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा जैसे विभागों से जुड़े अन्य प्रस्ताव भी रखे जा सकते हैं। पिछली बैठकों की तरह कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगने की उम्मीद है।


















