झारखंड वन विभाग में एक अधिकारी के पांच पद, आठ IFS ट्रेनी बेरोजगार: बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर तीखा प्रहार
रांची : झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर विपक्षी दल भाजपा ने एक बार फिर भ्रष्टाचार और नियमों की अवहेलना का आरोप लगाया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने वन विभाग में व्याप्त कथित अनियमितताओं को उजागर करते हुए कहा कि एक आईएफएस अधिकारी को विभाग का आधा बजट सौंप दिया गया है, जबकि आठ प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं। मरांडी ने इसे “चारा घोटाले जैसी साजिश” करार देते हुए सरकार से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “ये क्या हो रहा है, मुख्यमंत्री जी? एक तरफ आठ प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारी वेटिंग फॉर पोस्टिंग में हैं, और दूसरी तरफ एक अधिकारी पांच महत्वपूर्ण पदों पर विराजमान हैं। यह संयोग है या ‘जितना बड़ा दुराचारी, उतना बड़ा अधिकारी’ का एक और नमूना?” उन्होंने धनबाद के डीसी आदित्य रंजन के दोहरे पद संभालने की तर्ज पर वन विभाग का उदाहरण दिया।
एक अधिकारी के जिम्मे आधा बजट, पांच पदों की जिम्मेदारी
मरांडी के अनुसार, 2011 बैच के आईएफएस अधिकारी सबा आलम अंसारी वर्तमान में जमशेदपुर, सरायकेला और दलमा में डीएफओ (डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर) के साथ-साथ जमशेदपुर और चाईबासा में सीएफ (कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट) के पद संभाल रहे हैं। “अंसारी अकेले तीन डीएफओ और दो सीएफ के पद निभा रहे हैं। डीएफओ के तौर पर वे खुद राशि खर्च करते हैं और सीएफ के तौर पर उसी खर्च की सुपरविजन भी खुद ही कर रहे हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसा चारा घोटाले में अधिकारियों ने किया था,” मरांडी ने आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि अंसारी द्वारा जानबूझकर प्रमोशन न लेने के कारण आठ प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों की पोस्टिंग लंबित है। “सरकार ने इन्हें सिर्फ पांच पदों पर ही नहीं बिठाया, बल्कि राज्य भर के वन विभाग का लगभग आधा फंड इनके अधिकार क्षेत्र में सौंप दिया है। यह विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर सीधा सवाल है,” मरांडी ने कहा।
विपक्ष का सवाल: नियम-कानून ताक पर?
भाजपा नेता ने कहा कि हेमंत सरकार में रोज नए-नए कारनामों का रिकॉर्ड बन रहा है। “सारे नियम-कानून तख्त पर रख दिए गए हैं। वन विभाग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में ऐसी व्यवस्था से पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।” मरांडी ने मांग की है कि अंसारी की नियुक्तियों की जांच हो और ट्रेनी अधिकारियों की पोस्टिंग तुरंत की जाए।

















