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झारखंड राज्य सुखाड़ की ओर आगे बढ़ रहा है, यहां के किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बारिश का न होना बन गया है (Jharkhand state moving towards drought)

Jharkhand state moving towards drought

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झारखण्ड में  बारिश ने इस बार किसानो को खूब छकाया है . जरुरत के मुताबिक बारिश नहीं होने से झारखण्ड के लगभग सभी जिला  सुखाड़ के चपेट में आ सकता है । सावन के इस माह में कई जिले में   भूमि बंजर के स्वरुप में दिख रही है, जिन खेतों में अब तक धान लहलहाने चाहिए वहां अभी तक जुताई का कार्य नहीं किया गया है, किसान अपनी परम्परा को बचाने के लिए नदी और तालाब से पानी अपने खेतों में लाकर धानरोपनी का कार्य कर रहे हैं,लेकिन जलमय तालाब,कुआ और नदी वर्तमान समय में विरान पड़ा हुआ है,

जहां कल तक जल का प्रलय दिखता था वहां आज सुखा पड़ा हुआ है, ऐसे में इन किसानों को अपना बिचड़ा बचाने के लिए भी पंप के माध्यम से खेतों तक पानी लाने का कार्य करना पड़ रहा है, ताकि शुरूआती समस्या दूर हो जाए, लेकिन जिला की 85 प्रतिशत भूमि अब भी बारिश का इंतजार कर रही है,ताकि इन बेजान पड़े खेतों में जान लौट सके, लेकिन इन किसानों के सामने खेतों के अस्तित्व को बचाने को लेकर संघर्ष जारी है, ताकि इनके घरों के साथ साथ देश के थाली में अन्न पहुंच सके, किसानों का कहना है कि इनके सामने धान का बिचड़ा को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करना पड़ेगा, और ये इसके लिए ये किसान तैयार है, और अपने प्रयास को धरातल में उतारने का कार्य कर रहे हैं

सुखे खेतों को देख किसानों के सामने पलायन जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगी है, भूख के चंद दानों के लिए इन्हें मेघा का इंतजार करना पड़ रहा है वही दूसरी ओर झारखंड सरकार के मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव का कहना है कि राज्य में सुखा की स्थिति होने पर आपदा प्रबंधन के नियमों के अनुरूप किसानों को लाभ पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जाएगा

 

झारखण्ड  के खेतों में लगे धान के बिचड़े को बचाने की जद्दोजहद जारी है, खेतों में चंद घंटे पहले लगे धान की जमीन अब प्यासी हो गई है और जल के लिए अपना गला फाड़ मेघ के बरसने का इंतजार पल पल हर पल कर रही है, अब देखना है कि राज्य सरकार सुखा की स्थिति पर क्या निर्णय लेती है

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