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मुर्शिदाबाद-वक्फ-अधिनियम-हिंसा-2025 तीन मौत का जिम्मेवार कौन ? पूरा विश्लेषण

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के खिलाफ विरोध प्रदर्शन 8 अप्रैल 2025 से शुरू हुआ जो जल्द ही हिंसक हो गया। यह हिंसा जंगीपुर, सुती, शमशेरगंज, और धुलियान जैसे क्षेत्रों में फैल गई, जिसके परिणामस्वरूप तीन लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए, इस घटना में व्यापक स्तर पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा।

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आइए जानते है पूरी घटना को विस्तृत रूप से 
हिंसा की शुरुआत और घटनाक्रम
8 अप्रैल 2025: मुर्शिदाबाद के जंगीपुर में वक्फ (संशोधन) कानून के खिलाफ एक बड़ा जुलूस निकाला गया। प्रदर्शनकारी इस कानून को वापस लेने की मांग कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, रैली पीडब्ल्यूडी ग्राउंड, जंगीपुर में कई संगठनों द्वारा आयोजित की गई थी। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-12 को जाम कर दिया, जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, वाहनों में आग लगाई, और तोड़फोड़ की। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
9-10 अप्रैल: हिंसा बढ़ने पर जंगीपुर और आसपास के क्षेत्रों में धारा 163 (बीएनएसएस) लागू की गई, और इंटरनेट सेवाएं 11 अप्रैल तक निलंबित कर दी गईं। पुलिस ने 22 लोगों को गिरफ्तार किया और संवेदनशील इलाकों में कड़ी निगरानी शुरू की।
11 अप्रैल: जुमे की नमाज के बाद सुती और शमशेरगंज में प्रदर्शन फिर से हिंसक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी बसों, पुलिस वाहनों, और अन्य संपत्तियों को निशाना बनाया। रेल यातायात भी बाधित हुआ, और आजमगंज-फरक्का के बीच ट्रेनें रोकी गईं।
12 अप्रैल: हिंसा ने और गंभीर रूप ले लिया। धुलियान के शमशेरगंज में हरगोविंद दास (74) और उनके बेटे चंदन दास को भीड़ ने कथित तौर पर लूटपाट के बाद हत्या कर दी। चंदन दास (40), जो हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ बनाते थे, परिवार का दावा है कि हमलावरों ने घर में घुसकर चाकू से वार किया, जिससे दोनों की मौके पर मौत हो गई।
13 अप्रैल: सुती के साजुर चौराहे पर गोलीबारी की घटना में एक 21 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। कुछ रिपोर्ट्स में इसे पुलिस फायरिंग से जोड़ा गया, लेकिन पुलिस ने इसे स्पष्ट रूप से खारिज नहीं किया।
हिंसा का प्रभाव
मृत्यु और घायल: अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है—हरगोविंद दास, चंदन दास, और एक अज्ञात युवक। इसके अलावा, 15 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, और कई आम लोगो को भी चोटें आई हैं।
संपत्ति का नुकसान: प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों, पुलिस वैन, और सरकारी बसों में आग लगा दी। दुकानों और घरों में तोड़फोड़ की गई, खासकर धुलियान और सुती में। राष्ट्रीय राजमार्ग-12 और रेल यातायात बार-बार बाधित हुआ।
गिरफ्तारियां: रिपोर्टस की माने तो हिंसा के सिलसिले में 150 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से 70 सुती और 41 शमशेरगंज से हैं।
वक्फ (संशोधन) कानून का विवाद
वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। सरकार का दावा है कि यह कानून वक्फ बोर्ड के दुरुपयोग को रोकेगा और संपत्तियों का बेहतर प्रशासन सुनिश्चित करेगा। हालांकि, विपक्षी दलों और कुछ मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह कानून अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वायत्तता पर हमला है और इससे वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ेगा।
ममता बनर्जी का रुख: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 9 अप्रैल को घोषणा की कि यह कानून राज्य में लागू नहीं होगा। उन्होंने इसे केंद्र सरकार की “विभाजनकारी” नीति करार दिया और अल्पसंख्यकों को उनकी संपत्तियों की रक्षा का आश्वासन दिया।
बीजेपी का आरोप: बीजेपी ने ममता बनर्जी पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया। विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह हिंसा “पूर्व नियोजित” थी और हिंदू समुदाय असुरक्षित है। बीजेपी ने इसे राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था की विफलता बताया।
सरकारी और न्यायिक प्रतिक्रिया
पुलिस और सुरक्षा बल: हिंसा को नियंत्रित करने के लिए मुर्शिदाबाद में 1,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और बीएसएफ की आठ कंपनियों (लगभग 800 जवान) को तैनात किया गया है। केंद्र ने 300 अतिरिक्त बीएसएफ जवानों के साथ पांच और कंपनियां भेजीं।
कलकत्ता हाईकोर्ट: कोर्ट ने हिंसा पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रभावित क्षेत्रों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती का आदेश दिया। खंडपीठ ने कहा कि “न्यायालय आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकता
केंद्र सरकार: केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने 12 अप्रैल को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्थिति की समीक्षा की। केंद्र ने हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया और स्थिति पर नजर रखने की बात कही।
राज्यपाल की प्रतिक्रिया: राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने हिंसा की निंदा की और इसे “निहित स्वार्थों द्वारा उपद्रव” करार दिया। उन्होंने राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई और रिपोर्ट मांगी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ
तृणमूल कांग्रेस: ममता बनर्जी ने दावा किया कि कुछ लोग “राजनीति से प्रेरित होकर” हिंसा भड़का रहे हैं। उन्होंने केंद्र से इस कानून पर जवाब मांगा और कहा कि बंगाल में शांति बनाए रखने के लिए उनकी सरकार प्रतिबद्ध है।
बीजेपी: बीजेपी नेताओं, जैसे अमित मालवीय और सुकांत मजूमदार, ने हिंसा को ममता की “अल्पसंख्यक तुष्टिकरण” नीति का परिणाम बताया। उन्होंने बंगाल में राष्ट्रपति शासन की मांग भी उठाई।
अन्य संगठन: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष और राज्य मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की, लेकिन हिंसा को गलत ठहराया। आलिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया।
वर्तमान स्थिति (13 अप्रैल 2025)
मुर्शिदाबाद में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है। पुलिस और बीएसएफ ने संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त तेज कर दी है।
इंटरनेट सेवाएं अभी भी निलंबित हैं, और निषेधाज्ञा लागू है।
पुलिस ने अफवाहों के खिलाफ चेतावनी दी है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
जांच जारी है, और हिंसा के पीछे की साजिश की आशंका पर भी गौर किया जा रहा है।

जाहिर है यह हिंसा न केवल वक्फ कानून के विरोध से जुड़ी है, बल्कि पश्चिम बंगाल में सामाजिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण को भी उजागर करती है। ममता बनर्जी का कानून लागू न करने का बयान संवैधानिक रूप से विवादास्पद हो सकता है, क्योंकि संसद द्वारा पारित कानून सभी राज्यों पर लागू होता है। दूसरी ओर, बीजेपी का राष्ट्रपति शासन का आह्वान और हिंदू असुरक्षा का narrative भी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, खासकर 2026 के विधानसभा चुनावों के संदर्भ में।

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