नेपाल और स्थिरता की ओर बढ़ते कदम: सुशीला कार्की बनीं अंतरिम प्रधानमंत्री, मार्च 2026 में होंगे संसदीय चुनाव
काठमांडू : भ्रष्टाचार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बाद नेपाल में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के अंतरिम प्रधानमंत्री बनने से देश की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के कार्यालय ने शनिवार को घोषणा की कि संसदीय चुनाव अगले वर्ष 5 मार्च को आयोजित किए जाएंगे। यह फैसला संसद भंग करने और नई सरकार गठन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!पिछले सप्ताह ‘जन जेड’ (Gen Z) युवाओं द्वारा शुरू किए गए भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों ने देश को हिला दिया था। सोशल मीडिया प्रतिबंध और राजनीतिक भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते हिंसा भड़क उठी, जिसमें कम से कम 51 लोगों की मौत हो गई और 1,300 से अधिक घायल हुए। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, प्रधानमंत्री के आवास और सिंह दरबार सचिवालय सहित कई सरकारी इमारतों पर हमला किया, जिससे आग लग गई।
पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा, और राष्ट्रपति पौडेल ने 12 सितंबर को सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई। कार्की, जो 2016-2017 में नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रहीं, भ्रष्टाचार विरोधी छवि के लिए जानी जाती हैं। युवा प्रदर्शनकारियों ने डिस्कॉर्ड ऐप पर अनौपचारिक मतदान के जरिए उनका समर्थन किया था।
राष्ट्रपति कार्यालय के बयान के अनुसार, कार्की ने पदभार संभालने के बाद कुछ मंत्रियों को शामिल करते हुए मंत्रिपरिषद का गठन करने की योजना बनाई है। संभावना है कि आज कैबिनेट का विस्तार हो सकता है, जिसमें गृह, विदेश और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल होंगे। कार्की ने शपथ ग्रहण के दौरान कहा, “मैं देश और जनता के नाम पर प्रधानमंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की शपथ लेती हूं।”
राष्ट्रपति पौडेल ने कार्की की सिफारिश पर शुक्रवार रात को प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) भंग कर दी। उनके कार्यालय ने कहा कि नए प्रतिनिधि सभा के चुनाव 5 मार्च 2026 को होंगे, जो संविधान के अनुसार छह महीने के भीतर आयोजित होंगे। यह चुनाव 275 सदस्यों वाली संसद के लिए होंगे, जिसमें 165 सीटें प्रत्यक्ष मतदान से और 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व से भरी जाएंगी।
राष्ट्रपति ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और चुनाव प्रक्रिया में सहयोग करें। उन्होंने कहा, “संविधान जीवित है, संसदीय प्रणाली जीवित है और संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य कायम है। लोगों को अधिक उन्नत लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है।”

















