नेपाल की कमान संभालेंगी पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की, स्पीकर-राष्ट्रपति बैठक में लिया गया फैसला
काठमांडू : नेपाल में Gen-Z आंदोलन के बीच राजनीतिक संकट के दौरान देर रात राष्ट्रपति भवन में हुई महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार की कमान सौंपने का फैसला लिया गया है। यह निर्णय स्पीकर देवराज घिमिरे, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, प्रधान सेनापति जनरल अशोक राज सिग्देल और राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष नारायण दहाल की मौजूदगी में सहमति से लिया गया।
नेपाल में हाल के दिनों में युवा आंदोलनकारियों के प्रदर्शनों ने राजनीतिक अस्थिरता को जन्म दिया था। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने हिंसा और संसद परिसर में घुसपैठ के बाद इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद Gen-Z प्रदर्शनकारियों ने वर्चुअल बैठक में सुशीला कार्की के नाम का समर्थन किया था, जो नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रह चुकी हैं। हालांकि, कुछ गुटों में उनके भारत समर्थक होने के कारण विरोध भी देखा गया, लेकिन अंतिम बैठक में सहमति बन गई।
राष्ट्रपति भवन (शीतल निवास) में करीब पांच घंटे चली इस बैठक में अंतरिम सरकार के गठन पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्ति मिलने की संभावना लगभग पक्की हो गई है। यह कदम नेपाल में नई राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करने और युवाओं की मांगों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुशीला कार्की का जन्म 7 जून 1952 को विराटनगर में हुआ था। उन्होंने भारत के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से राजनीति विज्ञान और कानून की डिग्री हासिल की। वकालत के बाद वे नेपाल की सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज बनीं और 2015 से 2016 तक चीफ जस्टिस रहीं। भ्रष्टाचार पर उनकी सख्ती और कानूनी सुधारों के लिए वे जानी जाती हैं। Gen-Z आंदोलनकारियों के अलावा काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने भी उनका समर्थन किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुशीला कार्की के नेतृत्व में नेपाल-भारत संबंध मजबूत होंगे, क्योंकि वे भारत से जुड़े हुए हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा कर चुकी हैं। नेपाल सेना फिलहाल सुरक्षा की कमान संभाले हुए है और जल्द ही नई सरकार का गठन होने की उम्मीद है।
















