राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ऑनलाइन गेमिंग बिल को दी मंजूरी, रियल मनी गेम्स पर प्रतिबंध, जेल और जुर्माने का प्रावधान
नई दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसके साथ ही यह विधेयक अब कानून बन गया है। इस नए कानून के तहत रियल मनी गेमिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लग गया है, जिसमें फैंटेसी लीग, कार्ड गेम्स, ऑनलाइन लॉटरी, पोकर, रमी और सट्टेबाजी जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। यह कदम ऑनलाइन गेमिंग की लत, वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी समस्याओं पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कानून के प्रमुख प्रावधान
नए कानून के तहत ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवाएं प्रदान करने वालों के लिए कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर तीन साल तक की कैद, एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। इसके अलावा, ऐसे गेम्स का विज्ञापन करने वालों को दो साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वित्तीय लेनदेन की सुविधा देने वाले बैंकों और संस्थानों को भी तीन साल की सजा और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। बार-बार अपराध करने पर सजा को और सख्त करते हुए 3-5 साल की कैद और 2 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग को बढ़ावा
यह कानून जहां रियल मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाता है, वहीं ई-स्पोर्ट्स और ऑनलाइन सोशल गेम्स (जैसे कैंडी क्रश) को बढ़ावा देने पर जोर देता है। सरकार का लक्ष्य ई-स्पोर्ट्स को वैध खेल के रूप में मान्यता देकर भारत को वैश्विक गेमिंग हब के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए एक राष्ट्रीय स्तर की ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी का गठन किया जाएगा, जो उद्योग की निगरानी और रेगुलेशन करेगी।
क्यों जरूरी था यह कानून
सरकार का कहना है कि रियल मनी गेमिंग के कारण युवाओं और बच्चों में गेमिंग की लत बढ़ रही थी, जिससे वित्तीय नुकसान के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और आत्महत्या जैसे गंभीर परिणाम सामने आ रहे थे। अनुमान के अनुसार, हर साल लगभग 45 करोड़ लोग ऑनलाइन मनी गेमिंग में 20,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाते हैं। इसके अलावा, इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिमों के लिए भी किया जा रहा था।
उद्योग और खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया
हालांकि, इस कानून को लेकर गेमिंग उद्योग में चिंता बढ़ रही है। ई-स्पोर्ट्स प्लेयर वेलफेयर एसोसिएशन (EPWA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बिल पर पुनर्विचार की मांग की है। उनका कहना है कि स्किल-बेस्ड गेम्स और बेटिंग गेम्स के बीच अंतर को समझने की जरूरत है, क्योंकि यह कानून कई प्रोफेशनल गेमर्स की आजीविका को प्रभावित कर सकता है।

















