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राहुल गांधी भारतीय राजनीति के “मिस्टर लायर”, झूठ और बेबुनियाद आरोप उनकी आदत: प्रतुल शाहदेव

रांची : झारखंड भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राहुल गांधी को भारतीय राजनीति का “मिस्टर लायर” करार देते हुए कहा कि झूठ बोलना और बेबुनियाद आरोप लगाना उनकी आदत बन चुकी है। शाहदेव ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी पहले झूठे बयान देते हैं और जब उनके दावे गलत साबित होते हैं, तो माफी मांगकर चुपके से निकल जाते हैं।

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प्रतुल शाहदेव ने कहा कि राहुल गांधी ने “चौकीदार चोर है” जैसे आपत्तिजनक नारे के जरिए प्रधानमंत्री की छवि को धूमिल करने की कोशिश की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद उन्हें माफी मांगनी पड़ी। उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी ने बिना सबूत के यह दावा किया कि “आरएसएस ने गांधी जी की हत्या की”, जो अदालत में झूठा साबित हुआ और इसके लिए भी उन्हें माफी मांगनी पड़ी।

शाहदेव ने राहुल गांधी पर चीन की घुसपैठ को लेकर बार-बार झूठ फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना सीमा पर पूरी मजबूती के साथ तैनात है, लेकिन राहुल गांधी लगातार सेना का मनोबल तोड़ने की कोशिश करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी टिप्पणियों पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि एक सच्चा देशभक्त ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करता। शाहदेव ने यह भी बताया कि राहुल गांधी ने दिवंगत नेता अरुण जेटली के बारे में झूठा दावा किया कि वे उन्हें कृषि कानून को लेकर धमका रहे थे, जबकि जेटली का निधन कृषि कानून लागू होने से पहले ही हो चुका था।

प्रतुल शाहदेव ने राहुल गांधी के हालिया बयान, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग पर “वोट चुराने” का आरोप लगाया, को बेहद शर्मनाक और गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्था पर इस तरह का प्रश्नचिह्न लगाना निंदनीय है। शाहदेव ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बिना सबूत के प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग के लिए “फ्रॉड” जैसे शब्द के इस्तेमाल को विपक्ष के नेता के लिए अशोभनीय करार दिया।

शाहदेव ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को धमकी दी कि उनकी सरकार आने पर “सबको देख लिया जाएगा”, जो एक गैर-जिम्मेदाराना बयान है। उन्होंने मांग की कि राहुल गांधी को अपने बयानों के लिए सक्षम मंच पर सबूत पेश करने चाहिए, न कि केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए विवाद पैदा करना चाहिए।

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