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रामगढ़: झारखंड इस्पात फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में 16 घंटे बाद टूटा गतिरोध, मृतकों के परिजनों को मिलेगा 21-21 लाख मुआवजा

रामगढ़: झारखंड इस्पात फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में 16 घंटे बाद टूटा गतिरोध, मृतकों के परिजनों को मिलेगा 21-21 लाख मुआवजा

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आकाश शर्मा /रामगढ़

रामगढ़ जिले के हेसला स्थित झारखंड इस्पात फैक्ट्री में सोमवार तड़के हुए भीषण विस्फोट के बाद पैदा हुआ तनाव सोमवार रात 10 बजे समाप्त हो गया। लगभग 16 घंटों तक चले ग्रामीणों के उग्र आंदोलन के बाद जिला प्रशासन, फैक्ट्री प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच हुई त्रिपक्षीय वार्ता सफल रही। प्रबंधन द्वारा लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने फैक्ट्री के मुख्य द्वार से जाम हटाया।

मुआवजा और नौकरी पर बनी सहमति

त्रिपक्षीय वार्ता के दौरान ग्रामीणों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया गया और निम्नलिखित बिंदुओं पर सहमति बनी:
आर्थिक मुआवजा: फैक्ट्री प्रबंधन दोनों मृतक मजदूरों के आश्रितों को 21-21 लाख रुपये की मुआवजा राशि प्रदान करेगा।
इलाज की जिम्मेदारी: हादसे में झुलसे सात मजदूरों के बेहतर इलाज का पूरा खर्च फैक्ट्री प्रबंधन उठाएगा।
रोजगार का प्रावधान: समझौते के तहत यह भी तय हुआ है कि यदि इस हादसे में कोई मजदूर दिव्यांग (Permanent Disability) होता है, तो उसके एक आश्रित को फैक्ट्री में नियमित नौकरी दी जाएगी।

सोमवार सुबह धमाके से दहला था इलाका

गौरतलब है कि सोमवार की अहले सुबह झारखंड इस्पात फैक्ट्री में अचानक एक जोरदार विस्फोट हुआ था। इस हादसे में दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि सात अन्य मजदूर बुरी तरह झुलस गए थे। घायलों में से दो की स्थिति बेहद नाजुक बताई जा रही है। वर्तमान में घायलों का उपचार रामगढ़ के रांची रोड स्थित होप अस्पताल और रांची के देवकमल अस्पताल में चल रहा है।

16 घंटे तक चला विरोध प्रदर्शन

हादसे के तुरंत बाद, सुबह 6 बजे से ही स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर फैक्ट्री के गेट को जाम कर दिया था। आंदोलनकारी प्रबंधन से ठोस कार्रवाई और लिखित समझौते की मांग कर रहे थे। दिन भर चली खींचतान के बाद रात 10 बजे जब प्रबंधन ने लिखित में मांगें स्वीकार कीं, तब जाकर ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ और आंदोलन समाप्त हुआ।

मुख्य बिंदु
स्थान: हेसला, रामगढ़ (झारखंड)
फैक्ट्री: झारखंड इस्पात फैक्ट्री
मुख्य घटना: ब्लास्ट में 2 की मौत, 7 घायल
समझौता: 21 लाख मुआवजा और दिव्यांगता की स्थिति में नौकरी।

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