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सरायकेला: बच्चा चोरी की अफवाह ने ली हिंसक शक्ल, मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला को भीड़ ने खंभे से बांधकर पीटा

सरायकेला: बच्चा चोरी की अफवाह ने ली हिंसक शक्ल, मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला को भीड़ ने खंभे से बांधकर पीटा

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सरायकेला (झारखंड): झारखंड और बिहार में इन दिनों ‘बच्चा चोरी’ की अफवाहों का बाजार गर्म है, जिसने अब आम नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताज़ा मामला सरायकेला के कांड्रा थाना क्षेत्र का है, जहाँ डोकाकुली गांव में गुरुवार को महज एक संदेह के आधार पर भीड़ ने एक मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला की बेरहमी से पिटाई कर दी।
क्या है पूरी घटना?
जानकारी के अनुसार, गुरुवार दोपहर गांव में दो महिलाएं देखी गईं, जिनके बारे में अफवाह फैल गई कि वे पीयूष कालिंदी नामक बच्चे को ले जाने की कोशिश कर रही थीं। बच्चे की एक महिला परिजन के शोर मचाते ही ग्रामीण मौके पर जुट गए। ग्रामीणों के आक्रोश को देख एक महिला तो भागने में सफल रही, लेकिन दूसरी महिला भीड़ के हत्थे चढ़ गई।
आक्रोशित ग्रामीणों ने महिला को बिजली के खंभे से बांध दिया और उसके साथ मारपीट की। भीड़ उस महिला की बात सुनने या उसकी स्थिति समझने को तैयार नहीं थी।
पुलिस की जांच में चौंकाने वाला खुलासा
घटना की सूचना मिलते ही कांड्रा पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को ग्रामीणों के चंगुल से छुड़ाकर थाने ले गई। पूछताछ और जांच में जो सच सामने आया वह डराने वाला है:
नाम और पता: महिला का नाम ‘दूरी’ है और वह शारदाबेड़ा की रहने वाली है।
मानसिक स्थिति: जांच में पता चला कि महिला मानसिक रूप से विक्षिप्त (Mentally Unstable) है।
भटकने का कारण: पुलिस ने जब शारदाबेड़ा में संपर्क किया, तो पता चला कि वह अपने भाई द्वारा की जा रही प्रताड़ना और मारपीट के कारण घर छोड़कर इधर-उधर भटक रही थी।
थाना प्रभारी की अपील: अफवाहों से बचें
कांड्रा थाना प्रभारी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि बच्चा चोरी की कोई वारदात नहीं हुई है और यह पूरी तरह से एक अफवाह थी। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि:
किसी भी अजनबी या संदिग्ध को देखते ही कानून हाथ में न लें।
बिना पुष्टि किए किसी भी सोशल मीडिया मैसेज या अफवाह पर भरोसा न करें।
संदेह होने पर तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें।
सरायकेला की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। भीड़ की मानसिकता अक्सर निर्दोषों को निशाना बनाती है। मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को मदद की जरूरत होती है, हिंसा की नहीं।

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