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कब मिलेगी सेजल और मुन्नी ?  माँ की आंखे अपनी बेटी को देखने के लिए तरस रही है । पांच साल से DGP , DiG , IG के यहां भटक रही लापता सेजल की मां तो मुन्नी 24 दिनों से गायब है। 

कब मिलेगी सेजल और मुन्नी ?  माँ की आंखे अपनी बेटी को देखने के लिए तरस रही है । पांच साल से DGP , DiG , IG के यहां भटक रही लापता सेजल की मां तो मुन्नी 24 दिनों से गायब है। 

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झारखंड में अंश और अंशिका तो सकुशल घर लौट आये । रांची पुलिस ने बच्चा चोर गिरोह को पकड़ा 13 बच्चे मिले 12 गिरोह के सदस्य पकड़े गए । लेकिन अब भी लापता बेटियों के मामलों ने एक बार झारखंड के कई परिवारों में गहरी चिंता है। जिसमें बोकारो की सेजल झा को लापता हुए 5 साल 3 महीने से अधिक समय बीत चुका है, जबकि चतरा जिले की मुन्नी कुमारी (उर्फ रानू) के लापता होने को 24 दिन से ज्यादा हो गए हैं। दोनों मामलों में पुलिस जांच अब तक कोई ठोस सुराग नहीं दे पाई है, जिससे परिजनों की पीड़ा बढ़ती जा रही है।

बोकारो: सेजल झा का 5 साल पुराना केस अनसुलझा

मामला पिंडराजोरा थाना क्षेत्र की रहने वाली सेजल झा 16 अक्टूबर 2020 को ट्यूशन के लिए घर से निकली थीं और महज 15 मिनट में गायब हो गईं। इलाका बंगाल सीमा से निकट होने के कारण परिवार को मानव तस्करी या अपहरण का संदेह है। बोकारो पुलिस और स्पेशल ब्रांच की जांच में कोई सफलता नहीं मिली।
हालिया अपडेट में मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे CID यानी क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट को सौंप दिया गया है।
सेजल की मां उषा झा लगातार न्याय की मांग कर रही हैं और उम्मीद जता रही हैं कि CID की जांच से कोई नया सुराग मिल सकता है, वो बच्चा चोर गिरोह के पकड़ाये अपराधियों से अपने केस को जोड़कर देख रही है । खासकर रांची में पकड़े गए बच्चा चोर गिरोह के सदस्यों से जुड़ी जांच को अपनी बेटी के गुमशुदगी से जोड़ रही है। और सरकार से न्याय की उम्मीद में हैं ।

परिवार आज भी बेटी की वापसी का इंतजार कर रहा है, लेकिन 5 साल बीत जाने के बाद भी कोई ठोस जानकारी नहीं मिली।

चतरा: मुन्नी कुमारी की तलाश में सघन अभियान

गिद्धौर थाना क्षेत्र के गंगापुर गांव की 14 वर्षीय मुन्नी कुमारी 28 दिसंबर 2025 को दोस्तों के साथ पिकनिक/खेलने के लिए निकली थीं, लेकिन शाम तक घर नहीं लौटीं। परिजनों ने 31 दिसंबर को गुमशुदगी की लिखित शिकायत दर्ज कराई, लेकिन शुरुआती 10 दिनों में पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके कारण परिवार में रोष है।
अब पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) गठित की गई है।
जंगलों, पहाड़ों और आसपास के इलाकों में सघन तलाशी चल रही है। 100 से अधिक चौकीदार और पुलिसकर्मी जुड़े हुए हैं, ड्रोन कैमरे का भी इस्तेमाल हो रहा है।
सूचना देने पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
21 जनवरी तक भी कोई सुराग नहीं मिला, लेकिन अभियान जारी है। परिजन उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।

जाहिर है की झारखंड में लापता बच्चों के ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां मानव तस्करी, अपहरण या अन्य खतरे बने हुए हैं। हाल ही में कुछ अन्य मामलों में सफलता मिली है, लेकिन बोकारो और चतरा के ये मामले अभी अनसुलझे हैं। परिवारों की पीड़ा समझी जा सकती है।

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