111 वर्ष पुराना कचहरी भवन अब हेरिटेज सेंटर सह म्यूजियम: सिमडेगा की आजादी की गवाह इमारत नई पीढ़ी को कराएगी इतिहास से रूबरू
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा जिला प्रशासन ने जिले की ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वर्ष 1915 में ब्रिटिश शासनकाल में निर्मित पूर्व अनुमंडल कार्यालय (कचहरी भवन) को अब हेरिटेज सेंटर सह म्यूजियम के रूप में विकसित किया गया है। इस 111 वर्ष प्राचीन इमारत का उद्घाटन हाल ही में तीनों विधायकों, पीडीजे सिमडेगा और डीसी कंचन सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
यह भवन न केवल प्रशासनिक इतिहास का साक्षी है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम का जीवंत गवाह भी रहा है। 15 अगस्त 1947 की सुबह यहीं तत्कालीन एसडीओ एसके चक्रवर्ती ने तिरंगा फहराया था, और सिमडेगा की जनता ने पहली बार आजादी का असली मतलब समझा था। 2001 में जिला बनने पर यहां डीसी कार्यालय भी संचालित हुआ था।
म्यूजियम की प्रमुख विशेषताएं:
प्रशासनिक इतिहास भाग : प्रथम विश्व युद्ध में सिमडेगा के वीर जवानों के फ्रांस योगदान से जुड़े दस्तावेज, 1931 की जनगणना अभिलेख, लाह उत्पादन सामग्री, शिक्षा विकास के रिकॉर्ड।
सांस्कृतिक विरासत भाग : पारंपरिक वस्त्र, कृषि-शिकार उपकरण, पर्व-त्योहारों की वस्तुएं, आदिवासी जीवन शैली से जुड़ी सामग्री।
आजीविका केंद्र : पलाश और सुदिनियर शॉप जहां स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्थानीय उत्पाद बेचकर आजीविका कमाएंगी।
इसके अलावा एक लाइब्रेरी भी युवाओं के लिए खोली गई है। डीसी कंचन सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि यह केंद्र अतीत और भविष्य के बीच की कड़ी है, जो जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देगा। उन्होंने जोर दिया कि महिलाओं को संचालन की जिम्मेदारी सौंपकर उनके सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उप विकास आयुक्त दीपांकर चौधरी ने बताया कि यह भवन झारखंड आंदोलन और प्रथम विश्व युद्ध जैसे घटनाओं का साक्षी रहा है। विधायकों भूषण बाड़ा, नमन विक्सल कोंनगाड़ी और सुदीप गुड़िया ने इसे जिले के लिए गौरव का दिन बताया।
उद्घाटन के साथ ही 6 करोड़ 20 लाख से अधिक की 34 विकास योजनाओं का शिलान्यास भी हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, अधिकारी और स्थानीय लोग उपस्थित थे। यह हेरिटेज सेंटर अब सिमडेगा के निवासियों और पर्यटकों के लिए इतिहास, संस्कृति और प्रेरणा का जीवंत केंद्र बनेगा, जो नई पीढ़ी को अपने अतीत से जोड़ेगा।

















