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सिमडेगा में मातृ-पितृ पूजन दिवस पर भव्य आयोजन: बच्चों ने ली संस्कृति संरक्षण की प्रतिज्ञा

शंभू कुमार सिंह 

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सिमडेगा जिले के बानो में हुरदा मंदिर परिसर में मातृ-पितृ पूजन दिवस बड़े ही उत्साह और भक्ति भाव से मनाया गया। इस अवसर पर छोटे-छोटे बच्चों सहित सैकड़ों लोगों ने भाग लिया और भारतीय संस्कृति के संरक्षण तथा माता-पिता के सम्मान की शपथ ली।

यह पावन पर्व प्रतिवर्ष 14 फरवरी को मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत संत श्री आशारामजी बापू ने वर्ष 2007 में की थी। यह किसी विशेष जाति या धर्म के लिए नहीं, बल्कि समस्त मानवता के लिए है। माता-पिता और गुरु को प्रथम देवता मानकर उनका पूजन करने से परिवारिक बंधन मजबूत होते हैं, प्रेम, आदर और विश्वास बढ़ता है तथा बच्चों में सुसंस्कार का विकास होता है।

कार्यक्रम में गिरदा ओपी प्रशासन के अधिकारी भी उपस्थित रहे और अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आजकल बच्चे गलत दिशा में जा रहे हैं, ऐसे में इस तरह के आयोजन उन्हें सही मार्ग दिखाते हैं। शिक्षा के साथ-साथ सुसंस्कार मिलने से आज के बच्चे कल देश का मजबूत भविष्य बनेंगे। माता-पिता और गुरु ही जीवित देवता हैं तथा उनका सम्मान सबसे बड़ा तीर्थ है। इस पूजन से माता-पिता पर बच्चों की जिम्मेदारी बढ़ती है और वृद्धाश्रम जैसी स्थिति से बचाव होता है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में तकधार साहू, घनश्याम दास, गोपाल दास, फिंगू सिंह, संध्या देवी, कलावती देवी, आशा देवी, रेणु देवी, रेशमा देवी, सोनिया देवी, कृष्णा साहू, सुमति देवी सहित कई अन्य लोगों ने सक्रिय योगदान दिया।

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