सिमडेगा: बानो में जंगली हाथियों का आतंक, दो की मौत, क्षेत्र में दहशत का माहौल
सिमडेगा: बानो में जंगली हाथियों का आतंक, दो की मौत, क्षेत्र में दहशत का माहौल
नरेश की रिपोर्ट
सिमडेगा : झारखंड के सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में जंगली हाथियों का आतंक एक बार फिर से लोगों के लिए जानलेवा साबित हुआ है। शुक्रवार को हुए दो अलग-अलग हमलों में दो लोगों की जान चली गई, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। इन घटनाओं ने ग्रामीणों के बीच प्रशासन और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो लगातार बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष को रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

पहली घटना: बुरूइरगी गांव में युवक की मौत
पहली घटना बानो प्रखंड के बुरूइरगी गांव में देर रात घटी। जानकारी के अनुसार, एक जंगली हाथी गांव में घुस आया और उसने घरों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया। इसी दौरान 32 वर्षीय विकास ओहदार नामक युवक हाथी के सामने आ गया। गुस्साए हाथी ने उसे अपनी सूंड से उठाकर कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और प्रशासन हरकत में आए। तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया के निर्देश पर जिला परिषद सदस्य बिरजो कंडुलना घटनास्थल पर पहुंचे और पीड़ित परिवार को वन विभाग की ओर से तत्काल सहायता के रूप में 10,000 रुपये प्रदान किए गए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मामले की जांच शुरू की।
दूसरी घटना: पाबुड़ा पंचायत में महिला की जान गई
दूसरी घटना उसी दिन सुबह पाबुड़ा पंचायत के जबांग गिरजा टोली में हुई। 45 वर्षीय सिब्रिया लुगुन नामक महिला महुआ बीनने के लिए जंगल गई थी। इसी दौरान एक जंगली हाथी ने उस पर हमला कर दिया और उसे कुचलकर मार डाला। घटना की खबर फैलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। जिला परिषद सदस्य मौके पर पहुंचे और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। मृतका के परिवार को भी तत्काल सहायता के रूप में 10,000 रुपये दिए गए। ग्रामीणों ने बताया कि जंगल में हाथियों की मौजूदगी के बारे में पहले से कोई चेतावनी नहीं दी गई थी, जिसके कारण यह हादसा हुआ।
लगातार हमलों से बढ़ी चिंता
यह कोई पहली घटना नहीं है। एक दिन पहले ही बांसजोर प्रखंड में हाथी के हमले से एक व्यक्ति की मौत हुई थी, जबकि कोलेबिरा प्रखंड में तीन लोग घायल हुए थे। पिछले कुछ दिनों में सिमडेगा जिले में हाथियों के हमले की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों देखा जा रहा है। बानो क्षेत्र के लोग अब शाम ढलते ही घरों में दुबकने को मजबूर हैं, क्योंकि जंगली हाथियों का झुंड लगातार आसपास के इलाकों में घूम रहा है।
ग्रामीणों की मांग: हाथियों से निजात
हाथियों के बढ़ते आतंक से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि वन विभाग के पास हाथियों को जंगल में वापस भेजने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभाग केवल मुआवजे की राशि देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं ढूंढा जा रहा। एक ग्रामीण ने कहा, “हमें हर दिन अपनी जान का डर बना रहता है। खेतों में काम करना मुश्किल हो गया है, और जंगल में जाना तो अब जान जोखिम में डालने जैसा है।”
वन विभाग का रुख
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, यह भी स्वीकार किया गया कि हाथियों के प्राकृतिक आवास में कमी और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण यह संघर्ष बढ़ रहा है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल में अकेले न जाएं और हाथियों की मौजूदगी की सूचना तुरंत दें। मृतकों के परिजनों को नियमानुसार 4 लाख रुपये का मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
चुनौती और भविष्य
झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष कोई नई बात नहीं है। पिछले पांच वर्षों में राज्य में हाथियों के हमले में 250 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों का कटाव, खनन गतिविधियां और हाथियों के गलियारों में अतिक्रमण इस समस्या की जड़ हैं। सिमडेगा जैसे ग्रामीण इलाकों में जहां लोग अपनी आजीविका के लिए जंगल पर निर्भर हैं, वहां यह संघर्ष और गंभीर हो जाता है।
बानो में हुई इन ताजा घटनाओं ने एक बार फिर इस मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन और वन विभाग इस समस्या से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं, ताकि ग्रामीणों को इस आतंक से मुक्ति मिल सके।