सिमडेगा: मनरेगा में फर्जीवाड़ा के मामले में सख्त कार्रवाई, बीपीओ और जीआरएस की संविदा रद्द
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा जिला प्रशासन ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताओं, फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के आरोपों पर कड़ी कार्रवाई की है। उपायुक्त-सह-जिला कार्यक्रम समन्वयक कंचन सिंह ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए विभागीय जांच कराई, जिसमें दोषियों के खिलाफ त्वरित फैसला लिया गया।
जांच के बाद बानो प्रखंड।में पदस्थापित ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर (बीपीओ) चारू प्रसाद मांझी और ग्राम रोजगार सेवक (जीआरएस) केदार नाग की संविदा तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई है। दोनों को कार्यमुक्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई प्राप्त शिकायतों के आधार पर जिला स्तरीय जांच पूरी होने के बाद की गई।
जांच में सामने आईं प्रमुख अनियमितताएं:
जांच का दायित्व जिला भू-अर्जन पदाधिकारी (सिमडेगा) को सौंपा गया था, जिनकी रिपोर्ट में निम्नलिखित गंभीर खुलासे हुए:
– पंचायत गेनमेर, रायकेरा और जमतई।में मनरेगा योजनाओं का क्रियान्वयन ग्राम सभा के अनुरूप नहीं किया गया।
– गेनमेर पंचायत अंतर्गत बहुरण नायक का टीसीबी निर्माण तथा संतोषी देवी, गोविंद सन्यासी और झालो देवी के नाम से स्वीकृत लूज बोल्डर चेकडैम निर्माण योजनाएं धरातल पर मौजूद नहीं पाई गईं, लेकिन इन्हें पूर्ण दिखाकर राशि निकाल ली गई।
– महिला मेट के बजाय बिचौलियों के माध्यम से काम कराया जा रहा था।
– कुछ जॉब कार्ड पड़ोसी राज्य ओडिशा के व्यक्तियों के नाम पर जारी पाए गए।
– नाबालिग बच्चों (गुलाब महतो एवं अजीत सिंह) के नाम पर फर्जी जॉब कार्ड बनाकर आधार कार्ड में जन्म तिथि में डिजिटल हेरफेर कर अवैध मजदूरी राशि निकाली गई।
जांच रिपोर्ट के आधार पर दिए गए स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाए जाने पर मनरेगा नियुक्ति सेवा शर्त एवं कर्तव्य नियमावली के तहत यह कार्रवाई की गई।
डीसी कंचन सिंह का सख्त रुख
उपायुक्त कंचन सिंह ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बिना कार्य के निकाली गई राशि की ब्याज सहित वसूली सुनिश्चित की जाए और विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।

















