BANNA GUPTA

BANNA GUPTA: क्या मुख्यमंत्री के शक्तियों का उपयोग मंत्री बन्ना गुप्ता कर सकते है कैसे सचिव की नियुक्ति की सत्ता के गलियारों में है चर्चा का विषय

 

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BANNA GUPTA: ये झारखण्ड है भाई। झारखण्ड में आपको अजीबोगरीब कहानिया आपको सुनने को मिलेंगी। यह राज्य भ्र्ष्टाचार में में अव्वल तो है ही। और शायद यही कारण है की ईडी और इनकम टैक्स जैसे डिपार्टमेंट इस छोटे से राज्य में सबसे ज्यादा व्यस्त है। और हो भी क्यों ना यहाँ जो काम मुख्यमंत्री कर सकते है। वो काम यहाँ मंत्री जी कर देते है। अब एक ऐसा आर्डर पास हुआ है जिसको लेकर चर्चा है की पुरे भारत वर्ष में ऐसा आर्डर पास करने की हिमाकत किसी मंत्री ने अभी तक नहीं की है। कहा जा रहा है की मंत्री जी ने पुरे नियमो को ही ताक में रख एक ऐसा आदेश निकाला है जो झारखण्ड के सत्ता के गलियारे में चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल झारखण्ड के स्वास्थ मंत्री बनना गुप्ता ने अपने ही विभाग के सचिव पद के लिए किसी अधिकारी को प्रभार दे दिया हो. जबकि नियम की बात करें तो यह अधिकार सिर्फ राज्य के मुख्यमंत्री के पास होता है या फिर सिर्फ 30 दिनों के लिए मुख्य सचिव के आदेश पर किसी आईएएस अधिकारी को किसी पद का प्रभार दिया जा सकता है. लेकिन इन सारे नियमों को ताक पर रखकर स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने अपने विभाग के अभियान निदेशक आलोक त्रिवेदी को प्रभार देने का आदेश पहले अपने ही लेटर पैड पर निकलवा दिया. फिर बाद में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अधिसूचना भी जारी करवा दी.

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मंत्री बन्ना गुप्ता के इस कदम के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. बात यह भी हो रही है कि क्या बन्ना गुप्ता की बात सरकार में बैठा शीर्ष नेतृत्व नहीं मानता है. क्या पार्टी के माध्यम से मंत्री बन्ना गुप्ता सरकार तक अपनी बात नहीं पहुंचा पाते हैं. या फिर अपनी ही पार्टी के लोग मंत्री बन्ना की बात नहीं मानते हैं. बातें यह भी हो रही हैं कि मंत्री जी शायद खुद को सरकार से भी ऊपर समझते हैं. दूसरी तरफ कुछ बुद्धिजीवियों का यह कहना है कि मंत्री जी के इस कदम के बाद सरकार का आगे आकर विभाग की अधिसूचना को रद्द नहीं करना भी लोगों को चौंका रहा है.

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बता दें कि 31 दिसंबर को स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह रिटायर हो गए. करीब 18 दिनों से सचिव का पद खाली है. कहा जा रहा है कि इतने दिनों से मंत्री जी तक विभाग से जुड़े फाइल नहीं पहुंच रहे हैं. क्या इसी वजह से मंत्री जी ने तो ऐसा कदम नहीं उठा लिया. लेकिन सवाल है कि जब सरकार ही विभाग में सचिव बहाल नहीं कर रही तो मंत्री जी क्यों परेशान हैं. इससे ज्यादा दिनों से वन-पर्यावरण विभाग के सचिव का पद खाली है. लगभग एक महीने पूर्व एल ख्यांगते को मुख्य सचिव बनाने के बाद से इस विभाग में सचिव नहीं है. लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक किसी दूसरे आईएएस को प्रभार नहीं दिया गया है.

जबकि इस मामले में झारखण्ड के वरिष्ठ नेता सरयू राय ने मुद्दा उठाया है उन्होंने ट्वीट कर इसे गंभीर मामला बताया है और कहा है की इस आर्डर को जल्द वापस ले सर्कार क्युकी मंत्री के पास ये अधिकार ही नहीं है की वो अपने विभाग के सचिव की नियुक्ति का फ़ाइल खुद साइन करे और सचिव नियुक्त कर दे। ये अधिकार मुख्यमंत्री का का होता है। इस पर सरयू राय ने एक ट्वीट भी किया है।

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