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बिहार में साइबर ठगी का नया चेहरा: ‘ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब सर्विस’ खबर वायरल

बिहार में साइबर ठगी का नया चेहरा: ‘ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब सर्विस’ खबर वायरल

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बिहार के नवादा जिले से एक चौंकाने वाला साइबर ठगी का मामला अब वायरल हो गया  है, जिसे ‘ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब सर्विस’ नाम दिया  जा रहा है। इस घोटाले में ठग युवकों को निःसंतान महिलाओं को गर्भवती करने के लिए 5 से 20 लाख रुपये तक का लालच देते हैं। यह स्कैम विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और कम पढ़े-लिखे युवकों को निशाना बनाता है, जो आसान कमाई के झांसे में फंस जाते हैं। नवादा पुलिस ने इस गिरोह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की है, लेकिन यह नेटवर्क देश के अन्य हिस्सों में भी फैल रहा है।

घोटाले का तरीका
वायरल खबर के मुताबिक ठग फेसबुक, व्हाट्सएप, और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर आकर्षक विज्ञापन फैलाते हैं, जिसमें दावा किया जाता है कि किसी महिला को गर्भवती करने पर 5-20 लाख रुपये और असफल होने पर भी 50,000 रुपये तक मिलेंगे। प्रक्रिया शुरू करने के लिए पीड़ितों से 799 रुपये का रजिस्ट्रेशन शुल्क और बाद में 5,000 से 20,000 रुपये तक सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर वसूला जाता है। ठग विश्वास जीतने के लिए फर्जी दस्तावेज, AI-जनरेटेड तस्वीरें, और वीडियो का इस्तेमाल करते हैं। एक बार पैसे जमा होने के बाद, वे पीड़ितों का नंबर ब्लॉक कर देते हैं।

पुलिस की कार्रवाई :
नवादा पुलिस ने इस घोटाले के खिलाफ कई छापेमारियां की हैं। 2023 और 2025 में कई अभियानों में, नारदीगंज और रोह थाना क्षेत्रों से 8-10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें प्रिंस राज, भोला कुमार, और राहुल कुमार जैसे नाम शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, और ठगी से संबंधित डिजिटल साक्ष्य बरामद किए। हालांकि, पुलिस के सामने चुनौतियाँ बरकरार हैं, क्योंकि ठग सस्ते सिम कार्ड और डिस्पोजेबल फोन का इस्तेमाल करते हैं, और उनका नेटवर्क दिल्ली, झारखंड, और पश्चिम बंगाल तक फैला है। साइबर अपराध के मामलों में 2019-20 में 18 FIR से बढ़कर 2024-25 में 81 FIR दर्ज हुईं, लेकिन वास्तविक पीड़ितों की संख्या इससे कहीं अधिक है।

जागरूकता अभियान:
बिहार पुलिस ने युवाओं को इस तरह के फर्जी ऑफर्स से सतर्क रहने की सलाह दी है। साइबर सेल और विशेष जांच दल (SIT) ने जागरूकता अभियान शुरू किए हैं, जिसमें लोगों को संदिग्ध लिंक, वेबसाइट्स, और अनजान कॉल्स से सावधान रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साइबर कानून विशेषज्ञ पवन दुग्गल के अनुसार, भारत में लोग इंटरनेट पर दी गई जानकारी पर जल्दी भरोसा कर लेते हैं, जो इस तरह की ठगी को बढ़ावा देता है। पुलिस ने गृह मंत्रालय के प्रतिबिंब पोर्टल का उपयोग कर ठगों की ट्रैकिंग शुरू की है।

पीड़ितों की स्थिति:
इस घोटाले के शिकार ज्यादातर गरीब किसान और मजदूर हैं, जो सामाजिक शर्मिंदगी और बदनामी के डर से पुलिस में शिकायत दर्ज करने से हिचकते हैं। उदाहरण के लिए, वैशाली जिले के मुकेश कुमार जैसे पीड़ित अपनी जमा-पूंजी गंवाने के बाद भी चुप रहते हैं, क्योंकि यह मामला उनकी सामाजिक और पारिवारिक जिंदगी को प्रभावित कर सकता है।

सुरक्षा के लिए सुझाव :
संदिग्ध विज्ञापनों से बचें : सोशल मीडिया पर लुभावने ऑफर्स की जाँच करें और अनजान नंबरों पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
रजिस्ट्रेशन शुल्क से सावधान : किसी भी जॉब ऑफर के लिए पहले पैसे मांगने वाली योजनाएँ संदिग्ध हो सकती हैं।
पुलिस से संपर्क  अगर आप ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो तुरंत नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज करें।
जागरूकता फैलाएँ : अपने परिवार और दोस्तों को ऐसे घोटालों के बारे में बताएँ।

 

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