लैंड फॉर जॉब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को दिया झटका, निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक से इनकार
नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (18 जुलाई, 2025) को लालू यादव के खिलाफ निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से मना करते हुए कहा कि मुख्य मामले का फैसला होने देना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने लालू यादव को निचली अदालत में व्यक्तिगत पेशी से छूट देकर मामूली राहत प्रदान की है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट को इस मामले की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया है। लालू यादव ने अपनी याचिका में सीबीआई द्वारा दर्ज FIR और 2022, 2023 और 2024 में दायर चार्जशीट को रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने दावा किया था कि सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत आवश्यक अनुमति के बिना जांच शुरू की, जो गैरकानूनी है। हालांकि, सीबीआई का कहना है कि यह मामला 2018 के संशोधन से पहले का है, इसलिए धारा 17A लागू नहीं होती।
इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट ने 29 मई, 2025 को लालू यादव की याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने का कोई ठोस कारण नहीं है। हाई कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी किया था और अगली सुनवाई 12 अगस्त, 2025 के लिए निर्धारित की थी।
क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। सीबीआई के अनुसार, इस दौरान पश्चिम मध्य रेलवे जोन, जबलपुर में ग्रुप-डी की नियुक्तियों में अनियमितताएं हुईं। आरोप है कि नौकरी के बदले उम्मीदवारों से उनकी जमीनें लालू यादव के परिवार या उनके करीबियों के नाम पर कम कीमत में हस्तांतरित कराई गईं। इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती, बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव सहित अन्य लोग आरोपी हैं।
सीबीआई ने 18 मई, 2022 को इस मामले में FIR दर्ज की थी और अब तक तीन चार्जशीट दाखिल की हैं। जांच में सामने आया कि रेलवे में भर्ती के लिए कोई सार्वजनिक विज्ञापन नहीं जारी किया गया था, और जिन परिवारों ने जमीन दी, उनके सदस्यों को नौकरी दी गई।
















