ट्रंप के चार कॉल, पीएम मोदी का इनकार! भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव की नई कहानी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बढ़ते तनाव की खबरें सुर्खियों में हैं। जर्मनी के प्रतिष्ठित अखबार।फ्रैंकफर्टर आलगेमाइने साइटुंग (FAZ) ने एक सनसनीखेज दावा किया है कि ट्रंप ने हाल के हफ्तों में पीएम मोदी को चार बार फोन करने की कोशिश की, लेकिन मोदी ने हर बार बात करने से इनकार कर दिया। यह दावा दोनों देशों के बीच व्यापारिक और राजनयिक रिश्तों में बढ़ रही खटास को उजागर करता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ट्रंप के बयान से शुरू हुआ विवाद
यह तनाव उस समय शुरू हुआ जब ट्रंप ने 31 जुलाई को भारत की अर्थव्यवस्था को “डेड इकोनॉमी” करार देते हुए कहा, “मुझे इसकी परवाह नहीं कि भारत रूस के साथ क्या करता है। वे दोनों अपनी मृत अर्थव्यवस्थाओं को नीचे गिरा सकते हैं।” इस बयान पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई। पीएम मोदी ने 10 अगस्त को बिना नाम लिए इसका जवाब देते हुए कहा कि भारत दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की ओर अग्रसर है।
टैरिफ विवाद ने बढ़ाई तल्खी
अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव को और गहरा दिया है। ट्रंप ने न केवल व्यापार असंतुलन का हवाला दिया, बल्कि भारत के रूस से तेल खरीदने पर भी 25% जुर्माना लगाया। FAZ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अमेरिकी कृषि व्यवसाय के लिए अपने बाजार खोलने के दबाव को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत का यह रुख दक्षिण एशिया में उसकी रणनीतिक स्वतंत्रता और वैश्विक राजनीति में बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है।
पीएम मोदी की रणनीतिक चुप्पी
FAZ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, “ट्रंप कॉल करते हैं, लेकिन मोदी जवाब नहीं देते।” अखबार का दावा है कि पीएम मोदी का यह रवैया न केवल ट्रंप के बयान से नाराजगी को दर्शाता है, बल्कि उनकी सतर्कता और रणनीतिक दृष्टिकोण को भी उजागर करता है। भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा है और पश्चिमी प्रतिबंधों को नजरअंदाज करते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।
भारत की नई वैश्विक रणनीति
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि पीएम मोदी अब नई रणनीतिक दिशा की ओर बढ़ रहे हैं। वे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) जैसे मंचों पर रूस और चीन जैसे देशों के साथ संबंधों को मजबूत कर रहे हैं। FAZ के अनुसार, भारत का मानना है कि अमेरिका के साथ दोस्ती पर अधिक भरोसा नहीं किया जा सकता, खासकर जब ट्रंप की नीतियां अप्रत्याशित रही हैं।
कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
भारत और अमेरिका की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। FAZ ने भी अपनी रिपोर्ट में कॉल की तारीखों का उल्लेख नहीं किया, जिससे कुछ सवाल उठ रहे हैं। फिर भी, यह खबर वैश्विक मंच पर चर्चा का विषय बनी हुई है और भारत के सख्त रुख को रेखांकित करती है।
















