कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने झारखंड विधानसभा में उठाई आदिवासियों के हक और अधिकार की आवाज
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने झारखंड विधानसभा में आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने सदन के माध्यम से सरकार से आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा और छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी) तथा संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी) के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
आदिवासियों की जमीन और संस्कृति पर संकट
विधायक ने सदन में कहा कि झारखंड में आदिवासियों की पहचान उनके जंगलों, पहाड़ों और पुश्तैनी जमीनों से है। लेकिन, हाल के वर्षों में सीएनटी और एसपीटी एक्ट का उल्लंघन कर आदिवासियों की जमीन हड़पी जा रही है। उन्होंने चिंता जताई कि इस उल्लंघन के कारण आदिवासियों की संस्कृति, रहन-सहन और आबादी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। विधायक ने मांग की कि इन कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए ताकि आदिवासियों के हक और अधिकार सुरक्षित रहें।
सरकार का जवाब: जमीन हस्तांतरण पर रोक, अवैध हस्तांतरण पर कार्रवाई का प्रावधान
सरकार ने विधायक की मांग पर जवाब देते हुए कहा कि अनुसूचित जनजातियों की जमीनों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 की धारा 46, 48 और 240 के तहत अनुसूचित जनजाति रैयत, भूईंहरी और खुटकटी भूमि के हस्तांतरण पर पूर्ण प्रतिबंध है। साथ ही, धारा 71ए के तहत अवैध हस्तांतरण की स्थिति में जमीन वापसी का प्रावधान भी मौजूद है।
ट्रांसफार्मर वितरण में अनियमितता का मुद्दा
नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने गैर-सरकारी संकल्प के माध्यम से सिमडेगा जिले में ट्रांसफार्मर मरम्मत और वितरण में अनियमितता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि टीआर डब्ल्यू में ट्रांसफार्मर की मरम्मत तो की जाती है, लेकिन वितरण में सिलसिलेवार प्रक्रिया का पालन नहीं होता। उन्होंने मांग की कि मरम्मत किए गए ट्रांसफार्मरों का वितरण सख्ती से क्रमबद्ध तरीके से किया जाए।
इस पर विभाग ने जवाब दिया कि वितरण में कोई अनियमितता नहीं हो रही है। ट्रांसफार्मर का वितरण विधायक और सांसदों की मांग के आधार पर किया जाता है, जिसकी सूची भी उपलब्ध है।
आदिवासियों के हितों के लिए निरंतर प्रयास
कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने एक बार फिर आदिवासियों के हक और अधिकारों के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उनके द्वारा उठाए गए इन मुद्दों ने न केवल सिमडेगा जिले, बल्कि पूरे झारखंड में आदिवासी समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।

















