मनोज और किशन साहब ने कोयला खदान से कांके रोड तक मचाई है धूम: बाबूलाल मरांडी

रांची : झारखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार के संरक्षण में बड़े पैमाने पर फल-फूल रहे अवैध कोयला कारोबार पर तीखा प्रहार किया है। मरांडी ने इसे ‘काला खेल’ करार देते हुए कहा कि यह मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी “दो बैलों की कथा” की तर्ज पर रांची में चर्चा का विषय बन चुका है। उन्होंने अवैध व्यापारियों की जोड़ी – मनोज और किशन साहब – को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि ये कोयला खदानों से लेकर कांके रोड तक धूम मचा रहे हैं।

बाबूलाल मरांडी ने कहा, “राजधानी रांची के मोरहाबादी इलाके में होटल के बाहर सड़कों पर अक्सर खड़ी रहने वाली मनोज बाबू की बीएमडब्ल्यू कार लोगों के बीच खूब चर्चा का विषय बनी हुई है। चर्चा भी क्यों न हो? काली कमाई से खरीदी गई काली रंग की कार तो काली आंखों को भाती ही है।” उन्होंने होटल के अंदर करोड़ों के टर्नओवर वाले कारोबारियों के चाय-कॉफी पीते हुए कतार में बैठने को कॉर्पोरेट मीटिंग जैसा बताया, लेकिन हकीकत में इसे कोयला कारोबार, रैक लोडिंग और रेट फिक्सिंग का ‘काला खेल’ करार दिया।

बाबूलाल ने इस खेल के मुख्य सूत्रधारों के रूप में मनोज और किशन साहब को “खिलाड़ियों के खिलाड़ी” बताया। उन्होंने कहा, “”एक से भले दो” का जीता-जागता उदाहरण आजकल देखने को मिल रहा है। मनोज और किशन की जोड़ी कोयला खदानों से कांके रोड तक धूम मचा रही है।”

उनके अनुसार, मनोज जिले-जिले में एजेंट तैनात कर करोड़ों की वसूली का इंतजाम कर रहे हैं, जबकि किशन साहब दिल्ली से झारखंड तक हर तरह के ‘इंतजाम’ संभाल रहे हैं। मरांडी ने व्यंग्य भरे लहजे में कहा, “जब इतना बड़ा जिम्मा किशन जी ने अपने कंधों पर उठाया है, तो उनके आवागमन का जिम्मा तो किसी को उठाना ही पड़ेगा। इसलिए फॉर्चूनर से चलने वाले किशन साहब के सर्विसिंग बिल का इंतजाम भी ‘किसी जी’ ने अपने कंधों पर ले रखा है।” उन्होंने जोड़ा कि दोनों के बीच यह सहयोग और सहमति किसी बड़े राज्य स्तरीय सत्ताधारी नेता की मर्जी के बिना संभव नहीं है।

मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सीधे संबोधित करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री जी, समाचार माध्यमों और अन्य सूत्रों से ‘गैंग्स ऑफ कोयला चोरों’ एवं इनके हिस्सेदार आकाओं के काले कारनामों की जो जानकारी हमें मिल रही है, वैसे ही यह जानकारी आपको भी अवश्य पहुंच रही होगी।”

अगर आपकी इसमें कोई हिस्सेदारी है, तो चुप्पी साधे रहना ही आपके लिए भलाई है, लेकिन याद रखें – समय लग सकता है, पर इस महाघोटाले और झारखंड की खनिज संपदा को लूटकर तिजोरी भरने वालों को उनके कृत्यों की सजा जरूर मिलेगी। उन्होंने कहा, “अभी कोयला चोरों और उनके सरगनाओं की यह फिल्मी टाइप कहानी का स्क्रिप्ट देखते रहिए और थोड़ा इंतजार कीजिए।”

















