भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर तीखा प्रहार: चर्च सुरक्षा पर बैठक, लेकिन आदिवासी धार्मिक स्थलों की अनदेखी?

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर तीखा प्रहार: चर्च सुरक्षा पर बैठक, लेकिन आदिवासी धार्मिक स्थलों की अनदेखी?

रांची : झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जोरदार हमला बोला है। सिमडेगा जिला प्रशासन द्वारा चर्चों की सुरक्षा को लेकर ईसाई धर्मगुरुओं के साथ आयोजित बैठक पर मरांडी ने सवाल उठाते हुए सरकार पर धार्मिक भेदभाव और मतांतरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार सरना, मसना, जाहिर थान, मांझी थान, मंदिर और गुरुद्वारा जैसे धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की चिंता क्यों नहीं कर रही?

सरना स्थलों पर अतिक्रमण, मंदिरों पर हमले: मरांडी का सवाल
मरांडी ने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में झारखंड में संतालों के जाहिर थान, मांझी थान की जमीनों पर कब्जा और अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ी हैं। आदिवासियों के सरना स्थल, मसना स्थल, हड़गड़ी की जमीनों पर अतिक्रमण का विरोध करने के लिए लोगों को आंदोलन करने पड़ रहे हैं। राज्य में मंदिरों पर हमले हुए हैं—कहीं बम फेंके गए, कहीं पथराव हुआ, तो कहीं देवी-देवताओं की प्रतिमाएं खंडित की गईं। लेकिन क्या कभी राज्य सरकार ने इनकी सुरक्षा के लिए उन समाज के धर्मगुरुओं के साथ बैठक की? जवाब है—नहीं!”

उन्होंने सिमडेगा जिला प्रशासन के 4 अक्टूबर 2025 को जारी पत्र (संख्या 412) का जिक्र करते हुए कहा कि डिप्टी कमिश्नर (डीसी), एसपी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी 15 अक्टूबर को चर्चों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए ईसाई धर्मगुरुओं के साथ बैठक करने जा रहे हैं। “आखिर चर्च को ही विशेष सुरक्षा की जरूरत क्यों? क्या यह मतांतरण कराने वाले गिरोहों को संरक्षण देने की तैयारी है, जो ‘चंगाई सभा’ के नाम पर भोले-भाले आदिवासियों को धर्मांतरण करा रहे हैं?”

सिमडेगा में 51% आबादी का मतांतरण: सरकार की मंशा पर सवाल
मरांडी ने आरोप लगाया कि चर्च की साजिश, ‘चर्च प्रेमी’ अधिकारियों की कारगुजारी और चंगाई सभा जैसे अंधविश्वास को बढ़ावा देने के कारण सिमडेगा में आज लगभग 51% आबादी ईसाई धर्म में परिवर्तित हो चुकी है। “ऐसी सरकार प्रायोजित बैठक के पीछे छिपी मंशा पर लोगों को संदेह है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी को अगर सुरक्षा व्यवस्था करनी ही है, तो सिर्फ चर्च के लिए क्यों? सरना, मसना, हड़गड़ी स्थल, जाहिर थान, मांझी थान, मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों की सुरक्षा की चिंता क्यों नहीं?”

उन्होंने मांग की कि सिमडेगा बैठक का मूल एजेंडा सार्वजनिक किया जाए या फिर सभी धर्मों/समाज के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर सभी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर चर्चा हो।


















