केंद्रीय श्रम मंत्री के हस्तक्षेप के बाद ब्लिंकिट ने हटाया ’10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा: गिग वर्कर्स को बड़ी राहत
केंद्रीय श्रम मंत्री के हस्तक्षेप के बाद ब्लिंकिट ने हटाया ’10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा: गिग वर्कर्स को बड़ी राहत
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नई दिल्ली, 13 जनवरी : क्विक कॉमर्स सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ब्लिंकिट ने अपने सभी ब्रांड प्लेटफॉर्म्स (ऐप, वेबसाइट, विज्ञापन और सोशल मीडिया) से “10 मिनट में डिलीवरी” का प्रसिद्ध दावा पूरी तरह हटा दिया है। यह फैसला केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया के सीधे हस्तक्षेप के बाद लिया गया है, जिन्होंने डिलीवरी पार्टनर्स (गिग वर्कर्स) की सुरक्षा और कार्यस्थितियों को प्राथमिकता देते हुए कंपनियों से सख्त समय-सीमा हटाने की अपील की थी।
मंत्री की बैठक और सरकार का सख्त रुख
सूत्रों के अनुसार, श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने पिछले कुछ दिनों में ब्लिंकिट, ज़ेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और ज़ोमैटो के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी के दबाव के कारण डिलीवरी राइडर्स को तेज रफ्तार से वाहन चलाना पड़ता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। मंत्री ने कंपनियों को सलाह दी कि वे अपनी मार्केटिंग, ब्रांडिंग और ऐप में किसी भी प्रकार की सख्त डिलीवरी टाइमलाइन (जैसे 10 मिनट) का वादा न करें। इस दबाव के बाद ब्लिंकिट ने सबसे पहले कार्रवाई करते हुए अपना “10-मिनट” टैग हटा दिया।
कंपनी अब अपनी ब्रांडिंग को अधिक सामान्य और सुरक्षित संदेशों जैसे “हजारों उत्पाद आपके दरवाजे पर” पर केंद्रित कर रही है।
गिग वर्कर्स की हड़ताल ने बनाई स्थिति
यह बदलाव पिछले साल दिसंबर के अंत में गिग वर्कर्स की देशव्यापी हड़ताल के बाद तेजी से आया। हजारों डिलीवरी पार्टनर्स ने कम पारिश्रमिक, सामाजिक सुरक्षा की कमी और 10-मिनट डिलीवरी के असुरक्षित दबाव के खिलाफ आवाज उठाई थी। हड़ताल के बाद सरकार ने गंभीरता से मुद्दे को उठाया और कंपनियों से बातचीत शुरू की।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है। सख्त समय-सीमा हटने से राइडर्स पर अनावश्यक दबाव कम होगा और उनकी सुरक्षा में सुधार होगा।
अन्य कंपनियों पर भी असर
सूत्र बताते हैं कि ज़ेप्टो, स्विगी और ज़ोमैटो जैसी अन्य प्रमुख क्विक कॉमर्स कंपनियां भी जल्द ही इसी दिशा में कदम उठा सकती हैं। सरकार ने सभी प्लेटफॉर्म्स से भरोसा लिया है कि वे विज्ञापनों और सोशल मीडिया से समय-आधारित वादे हटा देंगी।
ग्राहकों पर क्या असर?
हालांकि डिलीवरी अब भी काफी तेज रहेगी, लेकिन अब कंपनियां “10 मिनट” जैसा फिक्स्ड टारगेट पब्लिकली नहीं दिखाएंगी। इससे ग्राहकों को थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव लंबे समय में सुरक्षित और अधिक टिकाऊ सेवा सुनिश्चित करेगा।

















