पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर: अमेरिका-ईरान की निर्णायक परमाणु वार्ता आज ओमान में, युद्ध टलने की उम्मीद बढ़ी
मस्कट (ओमान): पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में उच्च-स्तरीय परमाणु वार्ता शुरू हो रही है। पूरी दुनिया की नजर इस बैठक पर टिकी है, क्योंकि यह दोनों देशों के बीच सीधे टकराव को टालने और परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को एक्स पर घोषणा की कि वार्ता शुक्रवार सुबह 10 बजे (स्थानीय समय) मस्कट में होगी। उन्होंने ओमान के मध्यस्थता प्रयासों के लिए आभार जताया। अमेरिकी पक्ष की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ (और संभवतः जारेड कुश्नर) वार्ता का नेतृत्व करेंगे।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने विदेश मंत्री अराघची को निर्देश दिया है कि “उचित और सम्मानजनक माहौल” में निष्पक्ष, संतुलित और व्यावहारिक बातचीत की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि धमकियां या अवास्तविक अपेक्षाएं स्वीकार्य नहीं होंगी। यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार चेतावनी दी है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं करता तो “बुरी घटनाएं” हो सकती हैं। ट्रंप प्रशासन ने क्षेत्र में विमानवाहक पोत और अन्य सैन्य ताकतें तैनात की हैं, जिससे युद्ध की आशंका बढ़ गई थी।
वार्ता की पृष्ठभूमि में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलें, क्षेत्रीय प्रभाव (प्रॉक्सी ग्रुप्स) और हालिया घरेलू प्रदर्शनों पर दमन जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। ईरान ने वार्ता को केवल परमाणु मुद्दे और प्रतिबंध हटाने तक सीमित रखने पर जोर दिया है, जबकि अमेरिका व्यापक समझौते की मांग कर रहा है।
बैठक की जगह को लेकर अंतिम समय में बदलाव हुआ—शुरुआत में इस्तांबुल प्रस्तावित था, लेकिन ईरान के अनुरोध पर इसे ओमान स्थानांतरित किया गया, जो दोनों पक्षों के बीच विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में जाना जाता है। वार्ता अप्रत्यक्ष (मध्यस्थों के जरिए) होने की संभावना है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में सीधी बातचीत का जिक्र है।
यह वार्ता पिछले कई हफ्तों की तीखी बयानबाजी और सैन्य हलचल के बाद आई है। यदि सफल रही तो क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है, अन्यथा स्थिति और जटिल हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ओमान की मध्यस्थता दोनों पक्षों को समझौते की ओर ले जा सकती है, लेकिन मतभेद गहरे हैं।


















