संजीव सिंह “गरीबो के मसीहा ” लेकिन एक विवाद ने उनकी राजनीति को अर्श से फर्श पर ला दिया । आइये जानते है क्या था विवाद।
संजीव सिंह “गरीबो के मसीहा ” लेकिन एक विवाद ने उनकी राजनीति को अर्श से फर्श पर ला दिया । आइये जानते है क्या था विवाद।
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झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह (Sanjeev Singh) इस बार मेयर पद के लिए चुनाव मैदान में है । उनके चुनावी मैदान में आने के बाद से धनबाद में मेयर का चुनाव दिलचस्प हो गया है । क्योंकि संजीव सिंह करीब 7 सालो बाद एक बार फिर राजनीति में कदम रख रहे है । इन 7 सालों में उन्होंने काफी कुछ सहा है । जेल से लेकर बरी होने तक का सफर उनका काफी मुस्किलो भरा रहा है । आइये समझते है
संजीव सिंह राजनीति में एक चर्चित और विवादास्पद नाम रहे हैं। उनकी ज्यादातर विवादों की पूरी कहानी मुख्य रूप से परिवारिक-राजनीतिक दुश्मनी, हत्या के आरोप और कोयला क्षेत्र की प्रभावशाली पृष्ठभूमि से जुड़ी हुई है।
नीचे मुख्य विवादों की पूरी जानकारी क्रमबद्ध रूप से दी गई है:
मुख्य विवाद: चचेरे भाई नीरज सिंह हत्याकांड
घटना: 2017
21 मार्च 2017 को धनबाद में पूर्व डिप्टी मेयर और कांग्रेस नेता नीरज सिंह (संजीव सिंह के चचेरे भाई) सहित चार लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह मामला राजनीतिक और व्यापारिक दुश्मनी से जुड़ा माना गया, खासकर कोयला व्यापार और ट्रेड यूनियन (जैसे जनता मजदूर संघ) पर नियंत्रण को लेकर।
आरोप:
संजीव सिंह (तब भाजपा से झरिया विधायक) पर हत्या की साजिश रचने का मुख्य आरोप लगा। उन्हें 12 अप्रैल 2017 को सरेंडर करने के बाद गिरफ्तार किया गया और जेल भेजा गया। मामले में कुल 10-11 आरोपी थे।
परिवारिक पृष्ठभूमि:
दोनों चचेरे भाई सूर्यदेव सिंह (धनबाद के प्रभावशाली नेता और पूर्व कांग्रेस विधायक) के परिवार से है। सूर्यदेव सिंह की मौत के बाद राजनीतिक विरासत और कोयला क्षेत्र के प्रभाव पर विवाद बढ़ा।
कानूनी प्रक्रिया:
संजीव सिंह ने CBI जांच की मांग की। वे लंबे समय तक जेल में रहे, सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। आखिरकार 27 अगस्त 2025 को धनबाद की स्पेशल MP-MLA कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने उन्हें सम्मानपूर्वक निर्दोष घोषित किया।
संजीव सिंह का बयान:
नवंबर 2025 में उन्होंने चुप्पी तोड़ी और कहा कि “भाई नीरज की हत्या में नाम आना मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा दुख है।” उन्होंने नीरज को बचपन से राजनीतिक साथी बताया और परिवार राजनीति सिर्फ चुनाव जीतने के लिए नहीं लड़ता।
परिणाम:
इस मामले ने धनबाद की सियासत में गहरी दरार पैदा की। 2019 विधानसभा चुनाव में संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह (भाजपा) और नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा नीरज सिंह (कांग्रेस) आमने-सामने आईं। रागिनी सिंह झरिया से वर्तमान विधायक हैं।
सिंह मेंशन पर बमबाजी (फरवरी )घटना:
दो फरवरी की रात सरायढेला थाना क्षेत्र में संजीव सिंह के परिवार के आवास सिंह मेंशन पर बम फेंका गया। घटना के समय संजीव सिंह और उनकी पत्नी विधायक रागिनी सिंह मौजूद थे। परिवार बाल-बाल बचा।
प्रतिक्रिया:
रागिनी सिंह ने FIR दर्ज कराई और कहा कि हमला सफल होता तो बड़ा नुकसान होता। संजीव सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे डराने की साजिश बताया। अमन सिंह गिरोह ने जिम्मेदारी ली और धनबाद में दहशत फैलाने की धमकी दी।
घटना नगर निगम चुनाव के दौरान हुई, जहां संजीव सिंह मेयर पद के लिए निर्दलीय लड़ रहे हैं। इससे इलाके में दहशत फैली।
अन्य छोटे-मोटे विवाद
मजदूरों और ट्रेड यूनियन से जुड़े मुद्दे: संजीव सिंह जनता मजदूर संघ (हिंद मजदूर सभा से संबद्ध) के नेता हैं। वे BCCL मजदूरों के हक के लिए सक्रिय रहते हैं। जनवरी 2026 में झरिया में मजदूर मारपीट मामले पर उन्होंने शोषण के खिलाफ सख्त चेतावनी दी और कहा कि मजदूरों का शोषण बर्दाश्त नहीं होगा।
भाजपा के अंदर दावेदारी विवाद:
2026 धनबाद नगर निगम मेयर चुनाव में उन्होंने पार्टी से टिकट मांगा, लेकिन भाजपा ने संजीव अग्रवाल को समर्थन दिया। संजीव सिंह ने निर्दलीय उतरकर कहा कि चुनाव दलगत नहीं, विकास के लिए है। इससे पार्टी में गुटबाजी की खबरें आईं।
कुल मिलाकर, संजीव सिंह को धनबाद-झरिया में “गरीबों का मसीहा” और मजदूर नेता के रूप में देखा जाता है, लेकिन 2017 हत्याकांड ने उन्हें लंबे समय तक विवादों में रखा। अदालत से बरी होने के बाद वे सक्रिय राजनीति में लौटे हैं, और अब मेयर चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चर्चा में हैं।
















