रावण के हाथ में तलवार या चक्रनुमा ढाल? सिमडेगा में रावण दहन के बाद छिड़ी चर्चा

सिमडेगा: अल्बर्ट एक्का स्टेडियम में मंगलवार देर शाम आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में भगवान राम और लक्ष्मण के हाथों रावण वध की झांकी ने दर्शकों का मन मोह लिया। हालांकि, रावण के पुतले के एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में बनी चक्रनुमा आकृति को लेकर शहर में चर्चा शुरू हो गई। लोगों के बीच सवाल उठने लगा कि रावण के हाथ में दिखाई दे रही आकृति ढाल थी या चक्र।
दरअसल, रावण दहन कार्यक्रम के दौरान पुतले की बनावट ने कुछ गणमान्य लोगों और श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा। उनका कहना था कि धार्मिक आयोजनों में पारंपरिक प्रतीकों और आकृतियों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए। ढाल की बनावट ऐसी होनी चाहिए कि दर्शक उसे आसानी से पहचान सकें। लोगों ने इस मामले को आयोजन की कलात्मक तैयारी और धार्मिक प्रतीकों की प्रस्तुति में सावधानी बरतने से जोड़कर देखा।

रावण दहन आयोजन समिति के नरेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि रावण के हाथ में चक्र नहीं, बल्कि ढाल थी। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि उसकी बनावट ढाल जैसी कम और किसी दूसरी आकृति जैसी अधिक दिखाई दे रही थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले वर्ष आयोजन की तैयारी के दौरान इस पहलू पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
नवयुवक दुर्गा पूजा समिति, अपर बाजार के मुख्य पुरोहित विद्याबंधु शास्त्री ने भी धार्मिक आयोजनों में प्रतीकों की बनावट और प्रस्तुति को लेकर सावधानी बरतने पर जोर दिया। उनका कहना था कि आस्था से जुड़े आयोजनों में पारंपरिक स्वरूपों का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि किसी तरह की गलतफहमी पैदा न हो और लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होने की आशंका नहीं रहे।
रावण दहन का मुख्य संदेश बुराई पर अच्छाई की जीत है। ऐसे में आयोजन की भव्यता के साथ-साथ पुतले की बनावट और झांकी में इस्तेमाल किए गए प्रतीकों की स्पष्टता भी महत्वपूर्ण है। अब आयोजन समिति के आश्वासन के बाद उम्मीद की जा रही है कि अगले वर्ष इन पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि चर्चा पुतले के हथियारों की पहचान के बजाय रावण दहन के संदेश पर केंद्रित रहे।

















