रांची में बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ मशाल जुलूस, हिंदू जागृत मंच ने किया विरोध प्रदर्शन
रांची : झारखंड प्रदेश की राजधानी रांची में रविवार को हिंदू जागृत मंच ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे कथित अत्याचार और नरसंहार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। पहाड़ी मंदिर से शुरू होकर अल्बर्ट एक्का चौक तक निकाले गए मशाल जुलूस में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया और भारत सरकार से बांग्लादेश पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!प्रदर्शनकारियों ने हाथों में मशालें थामे नारे लगाए और बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा की गुहार लगाई। मंच के प्रदेश अधिकारी ऋषिनाथ शाहदेव ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार और नरसंहार तत्काल बंद होना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि जिस तरह पाकिस्तान को सबक सिखाया गया, उसी तरह बांग्लादेश को भी सबक सिखाया जाए। साथ ही, दीपू चंद्र दास जैसे पीड़ितों को न्याय दिलाया जाए।
मंच के एक अन्य प्रदेश अधिकारी सुजीत सिंह ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहा क्रूर व्यवहार चिंता का विषय है। भारत सरकार को तत्काल कड़ा एक्शन लेना चाहिए और NRC के तहत बांग्लादेशी हिंदुओं को भारत लाकर नागरिकता प्रदान की जानी चाहिए।
निशांत यादव ने प्रदर्शन में कहा कि भारत द्वारा बनाया गया देश आज भारत को आंख दिखा रहा है, जो असहनीय है। उन्होंने मोदी सरकार से बांग्लादेश पर कार्रवाई करने और सेना को खुली छूट देने की मांग की।
इस मशाल जुलूस को राष्ट्रीय सनातन युवा मंच का भी समर्थन प्राप्त हुआ। जुलूस में पूनम सिंह, किरण पाठक, रानी मिश्रा, नूपुर जी, चंदन मिश्रा, सुनील वर्णवाल, अमित अग्रवाल, ऋषभ सिंह, अरविंद गुप्ता, सुरेंद्र यादव, नितिन ओझा, वेद सिंह, विपुल मिश्रा, प्रतीक कुमार, गजन तिवारी, सुमित सोनी, यश लोहार, शशिकांत तिवारी, अशोक पांडेय, आशीष शर्मा, सुनील साहू, नवनीत कुमार, रवि सिंह, बैजू सोनी, रोहित जी, शिवम सोनी, आकाश सिंह, अभिनव कुमार, विशाल सिंह, चंदन सिंह, कन्हैया शाह, सतीश मिश्रा, सोनू गुप्ता, प्रतीक सिंह, सुनील तिर्की, राहुल तिर्की, राजेश जी, ओमप्रकाश शर्मा, सोनू भारद्वाज और राजा सरकार सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
यह प्रदर्शन बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर बढ़ते हमलों के खिलाफ देशभर में हो रहे विरोध का हिस्सा है। हाल के महीनों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर कई हमले दर्ज किए गए हैं, जिन्हें मानवाधिकार संगठनों और भारतीय पक्ष ने गंभीरता से उठाया है।

















