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खेल भावना, अनुशासन और उत्साह का अद्भुत संगम : विद्या मंदिर उच्च विद्यालय, लचरागढ़ में खेजल महाकुंभ के तीसरे दिन

शंभू कुमार सिंह

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लचरागढ़, सिमडेगा : सिमडेगा जिले के लचरागढ़ स्थित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय में आयोजित खेजल महाकुंभ के तीसरे दिन खेल भावना, अनुशासन और उत्साह का अनुपम दृश्य देखने को मिला। यह विद्यालय वनवासी कल्याण केंद्र की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड द्वारा संचालित है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पत्रकार धर्मवीर सिंह एवं अनुज साहू उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने भैयाओं के कबड्डी दल के खिलाड़ियों से आत्मीय संवाद किया, उनका उत्साह बढ़ाया तथा खेल भावना के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन की शुभकामनाएं दीं। टॉस के साथ खेल की शुरुआत हुई।

धर्मवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि एक छोटे से गांव में स्थित यह विद्यालय सर्वांगीण विकास की दृष्टि से विभिन्न खेलों का आयोजन कर सराहनीय कार्य कर रहा है। विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ खेल एवं संस्कार के क्षेत्र में भी मजबूत आधार तैयार कर रहा है, जो भविष्य में जिला स्तर पर अग्रणी भूमिका निभाएगा।

अनुज साहू ने कहा कि यह विद्यालय क्षेत्र का गौरव है, जहां शिक्षा के साथ संस्कार, सेवा, स्वावलंबन एवं देशभक्ति की भावना विकसित की जाती है। खेल महाकुंभ के अंतर्गत वॉलीबॉल, फुटबॉल, गुलेल, खो-खो एवं कबड्डी जैसे खेल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम हैं। आने वाले समय में यह संस्थान खेल एवं शिक्षा दोनों क्षेत्रों में विशिष्ट पहचान बनाएगा।

खेल परिणाम : भैयाओं की कबड्डी

एकलव्य बनाम शिवाजी – शिवाजी विजयी

भरत बनाम शिवाजी – शिवाजी विजयी

एकलव्य बनाम शिवाजी – शिवाजी विजयी

एकलव्य बनाम अरुणि – एकलव्य विजयी

खेल परिणाम : बहनों की कबड्डी

भरत बनाम अरुणि – अरुणि विजयी

खो-खो प्रतियोगिताः

भैयाओं में शिवाजी बनाम भरत – शिवाजी विजयी

एकलव्य बनाम अरुणि – एकलव्य विजयी

प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू ने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि खेल केवल जीत-हार का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, परिश्रम, आत्मसंयम एवं टीम भावना की जीवंत पाठशाला है। मैदान में पसीना बहाने वाला विद्यार्थी जीवन के हर संघर्ष में विजयी होता है। हार सीख देती है और जीत प्रेरणा। विद्यार्थियों के समर्पण एवं खेल भावना की सराहना करते हुए उन्होंने फाइनल में श्रेष्ठ प्रदर्शन की उम्मीद जताई।

कार्यक्रम में यमुना कुमारी, दशरथी कुमारी, बिमला देवी, लक्ष्मी देवी, अर्जुन महतो, बसंती बड़ाईक, शकुंतला कुमारी, गणेश जी, जगेश्वर सिंह, प्रमोद पानी, गर्दन कुमार, प्रगति सिंह, दीक्षित कुमारी, सुनीति कुमारी, संध्या बड़ाईक, रजनी बड़ाईक, गंगोत्री कुमारी, भागीरथी सिंह, शिविरचंद नायक, सवर्ण सिंह, कालीचरण सिंह, एटलस कुमार एवं तरुण सिंह आदि की उपस्थिति रही। मंच संचालन प्रमोद पाणिग्राही एवं निर्णायक की भूमिका अर्जुन महतो ने निभाई।

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