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बख्तर साय-मुंडल सिंह स्मृति स्थल पर शराबियों का जमावड़ा, आस्था का अपमान, गंदगी और अपराध का डर बढ़ा

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शंभू कुमार सिंह

झारखंड के सिमडेगा जिले के बोलबा मुख्यालय में बख्तर साय और मुंडल सिंह जैसे महापुरुषों की स्मृति स्थल पर शराब दुकान का खुलना स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है। विरोध प्रदर्शनों के बावजूद अंग्रेजी शराब की दुकान का संचालन शुरू होने से धार्मिक-सामाजिक आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा है। शाम ढलते ही शराबियों का जमावड़ा लग जाता है, जिससे गंदगी फैल रही है और बच्चों-युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है, जबकि शराब से जुड़ी दुर्घटनाओं का भय भी हावी हो गया है।

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अपर बाजार स्थित इस प्रतिमा स्थल पर रौतिया समाज सहित विभिन्न समुदाय के लोग हर वर्ष बड़े श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना करते हैं। यहां महावीर झंडा भी फहराया जाता है, जो स्वतंत्रता संग्राम के इन वीर सपूतों की स्मृति को जीवंत रखता है। बख्तर साय और मुंडल सिंह 1812 के कोल विद्रोह के प्रमुख नेता थे, जिन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ किसानों के हित में संघर्ष किया। 4 अप्रैल 1812 को कोलकाता में उन्हें फांसी दी गई थी। इनकी शहादत आज भी युवाओं को प्रेरित करती है, लेकिन अब यही स्थान शराबियों की पनाहगाह बन गया है।

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स्थानीय निवासी बताते हैं कि शराब दुकान के ठीक बगल में स्थित होने से शराबी प्रतिमाओं के सम्मान में कोई परवाह नहीं करते। शराब पीकर वे बोतलें, डिस्पोजल ग्लास और खाने-पीने के सामान का कचरा यत्र-तत्र बिखेर देते हैं। कांच की बोतलों को तोड़कर फैलाई जा रही गंदगी ने पूरे इलाके को अस्वच्छ बना दिया है।

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