बिहार चुनाव 2025 : महागठबन्धन में पेंच, चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है असर

नवीन कुमार
बिहार विधान सभा के पहले चरण के मतदान के लिए नामांकन का कल अंतिम दिन है। NDA ने न केवल सीट शेयरिंग और प्रत्याशियों की घोषणा के साथ ही नामंकन प्रक्रिया में भी बढ़त बना ली है। तो दूसरी ओर महागठबन्धन में सीट शेयरिंग को लेकर अभी भी असमंजस और अनिश्चितता का माहौल बरकरार है। हालांकि इस बीच महागठबंधन के घटक दलों की ओर से एक और जहां एकतरफा उम्मीदवारों को गुपचुप तरीके से सिम्बल वितरण किये जा रहे हैं वहीं कई दल से जुड़े प्रत्याशी नामांकन भी कर रहे हैं।

काँग्रेस ने अपनी ओर से 15 से अधिक प्रत्याशियों की घोषणा भी कर दी है तो साहनी की VIP पार्टी को लेकर असमंजस की स्थिति अभी भी बरकरार है, वहीं लेफ्ट पार्टियां अपनी राह चलती दिख रही हैं। ऐसे में वोटर के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वोटर निराश और हताश हैं। हालांकि तेजस्वी ने तीसरी बार राघोपुर से नामांकन दाखिल करने के बाद कहा कि महागठबन्धान एक है, लेकिन उनका यह कहना ही कई सवाल खड़े कर रहा है।

क्या सचमुच गठबंधन एक है? यदि गठबंधन एक है तो आखिर सीट शेयरिंग को लेकर असमंजस की स्थिति क्यों? सीधी सी बात है महागठबन्धान में सब कुछ ठीक ठाक नहीं है यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है। भले ही तेजस्वी कुछ भी बोलें लेकिन जनता सबकुछ देख रही है।

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने लालू यादव से बात कर जल्द से जल्द सीट शेयरिंग को अंतिम रूप देने को लेकर बातें की है। लेकिन सवाल यह है कि जब सीट शेयरिंग पर ही दलों के बीच घमासान है तब किला आखिर कैसे फतह होगा? सवाल यह भी है कि क्या ऐसे में दलों के बीच वोट ट्रांसफर हो पायेगा ? जबकि सभी को पता है कि पहले चरण में हुआ मतदान सरकार बनाने में अहम है।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि बिहार में चुनाव को लेकर फिलहाल तक कि स्थिति में NDA मजबूत दिखाई दे रहा है। ऐसे में अगला कुछ घंटा काफी अहम और चुनाव परिणाम को लेकर निर्णायक कहे जा सकते हैं ऐसा कहा जाय तो शायद गलत नहीं होगा। JDU प्रवक्ता का यह कहना कि महागठबंधन का All is well का दावा खोखला लगता है सही प्रतीत हो रहा है।


















