बोलबा में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की 82वीं जयंती हर्षोल्लास एवं श्रद्धा के साथ मनाई गई
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा/बोलबा : झारखंड आंदोलन के प्रणेता एवं राज्य के निर्माता, स्वर्गीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जन्मदिवस (82वीं जयंती) बोलबा प्रखंड मुख्यालय स्थित बाजार टाड़ में पूरे उत्साह, सम्मान और भावुकता के साथ मनाया गया। यह उनकी पहली जयंती है, जो उनके निधन (4 अगस्त 2025) के बाद मनाई गई, जिसके कारण कार्यक्रम में श्रद्धा की गहराई और भी अधिक दिखाई दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड सचिव जैनुल अंसारी ने की। इस अवसर पर प्रखंड उपाध्यक्ष गजाधर सिंह, जिला सदस्य विरेंदर बराइक, अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष खृस्तोफर डुंगडुंग, पूर्व कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष ललन सिंह, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रमेश मंडल सहित कई गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में ग्रामीण तथा कार्यकर्ता उपस्थित रहे। ग्रामीणों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया।
श्रद्धांजलि और जन्मदिवस समारोह
कार्यक्रम की शुरुआत स्वर्गीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करने से हुई। इसके बाद केक काटकर उनका जन्मदिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
समाज सेवा की भावना को जीवंत करते हुए वृद्ध एवं जरूरतमंद लोगों के बीच कंबल वितरण किया गया, जिससे ठंड के इस मौसम में उन्हें बड़ी राहत मिली। यह कार्य दिशोम गुरु की जनकल्याणकारी सोच को याद दिलाता है, जो हमेशा वंचितों के साथ खड़े रहते थे।
दिशोम गुरु के योगदान पर प्रकाश
वक्ताओं ने स्वर्गीय शिबू सोरेन के झारखंड राज्य निर्माण में दिए अतुलनीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु ने आदिवासियों, दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों, जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया। महाजनी प्रथा और शोषण के खिलाफ उनके आंदोलन ने जनआंदोलन को नई दिशा दी और अंततः 2000 में अलग झारखंड राज्य का सपना साकार हुआ।
वक्ताओं ने युवाओं से अपील की कि वे दिशोम गुरु के विचारों, संघर्षों और आदर्शों से प्रेरणा लेकर सामाजिक न्याय, एकता और विकास के लिए कार्य करें। कार्यक्रम का समापन स्वर्गीय शिबू सोरेन के संघर्षों को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का दृढ़ संकल्प लेकर किया गया।

















