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देश को बांटने की साजिशें जारी: कुड़मी आंदोलन से लेकर जाति-धर्म के नाम पर फूट

अंग्रेजों ने भारत पर लगभग 200 वर्षो तक शासन किया। सवाल यह है कि शुरुआत में मात्र अंगुलियों मे गिने जा सकने वाली संख्या से देश मे आयी एक व्यापारिक कंपनी ने आखिर इतना बड़ा साम्राज्य कैसे स्थापित किया? आखिर उनके पास ऐसा कौन सा मंत्र या फार्मूला था जिसने सोने की चिड़िया कहे जाने वाले हमारे भारतवर्ष पर न केवल शासन किया बल्कि इसे जमकर लुटा भी

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सीधी सी बात है उनका एकमात्र फार्मूला था “बांटो और राज करो”…. उन्होंने कभी धर्म के नाम पर, तो कभी समाज और जाति के नाम पर इस फॉर्मूले को खूब अपनाया। उसका परिणाम हमारे सामने है। 1947 में देश दो भागों में बंटा । देश के विभाजन के बाद अंग्रेज तो चले गए लेकिन उनके पिट्ठू आज भी हमारे बीच किसी न किसी रूप में मौजूद हैं। एक बार फिर से समाज ,जाति और धर्म के नाम पर देश को तोड़ने की साजिश बदस्तूर जारी है। और इसको हवा देने में लगी हैं देश विरोधी ताकतें

कभी CAA के विरोध के नाम पर भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे सुनने को मिलते हैं, तो कभी SIR के नाम पर वोट चोर गद्दी छोड़ के नारे लगाए जाते हैं।तो दक्षिण भारत मे भाषा के आधार पर आंदोलन की धमकी दी जाती है। अगले कुछ दिनों में बिहार में विधानसभा के चुनाव होने हैं । आगे बढ़ते देश के साथ जातीय भेदभाव को भूलने की कोशिश में लगी जनता को चुनाव के बहाने एक बार फिर से जाति के बहाने गोलबंद करने की कोशिश बदस्तूर जारी है।

वहीं झारखंड में एक अलग तरह का आंदोलन देखने को मिल रहा है। अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने की मांग को लेकर कुड़मी समाज आंदोलन की राह पर है। कुड़मी समाज की मांग है की उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाय। इसके लिए उन्होंने आगामी 20 सितंबर को रेल रोको आंदोलन की घोषणा भी की है। इस मुद्दे पर कुड़मी और अनुसूचित जनजाति समाज आमने सामने भी नजर आ रहे हैं।इसका फलाफल क्या होगा लोगों की निगाहें इसपर टिकी हुई है।

लेकिन देखा जाय तो किसी न किसी मुद्दे को लेकर देश के विभिन्न भागों में देश को तोड़ने और समाज को आपस मे बांटने की साजिश शुभ संकेत नहीं माने जा सकते हैं ।ऐसे में योगी आदित्यनाथ का यह कहना कि बंटोगे तो कटोगे, एक रहोगे नेक रहोगे। एक ऐसा मंत्र है जो न केवल देश को अक्षुण्ण रखेगा बल्कि इससे हम सुरक्षित भी रहेंगे। अब यह हमपर निर्भर है कि हमे आगे क्या करना है।

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