कुड़मी समाज के ‘रेल टेका, डहर छेका’ आंदोलन को आजसू का समर्थन, सुदेश महतो ने की त्वरित निर्णय की मांग

कुड़मी समाज के ‘रेल टेका, डहर छेका’ आंदोलन को आजसू का समर्थन, सुदेश महतो ने की त्वरित निर्णय की मांग

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रांची : आजसू पार्टी के प्रमुख और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो ने कुड़मी समाज के ‘रेल टेका, डहर छेका’ आंदोलन को पूर्ण समर्थन देते हुए केंद्र और राज्य सरकार से अविलंब निर्णय लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कुड़मी समुदाय पिछले 90 वर्षों से ऐतिहासिक अन्याय के खिलाफ धैर्यपूर्वक अपनी लड़ाई लड़ रहा है, और अब इस धैर्य की और परीक्षा नहीं ली जानी चाहिए।

मुरी में कुड़मी समाज के आंदोलन में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत में सुदेश महतो ने कहा कि कुड़मी समाज की मांगें पूरी तरह जायज हैं। उन्होंने कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने और कुड़मालि भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता देने की मांग को ऐतिहासिक और तथ्यपरक बताया। उन्होंने कहा कि झारखंड सहित आसपास के राज्यों में इस आंदोलन ने व्यापक समर्थन हासिल किया है, जिससे कुड़मी समाज की एकता और ताकत का प्रदर्शन हुआ है।

झामुमो सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

सुदेश महतो ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2019 में कुड़मी समाज की मांगों पर सहमति जताई थी और हस्ताक्षर भी किए थे, लेकिन अब सरकार अपने वादों से पीछे हट रही है। उन्होंने कहा, “यह एक लंबी लड़ाई है। जैसे देश की आजादी एक दिन में नहीं मिली, वैसे ही कुड़मी समाज ने जागरूकता और एकता के बल पर अपनी आवाज बुलंद की है, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर गंभीर नहीं दिख रही।”

राष्ट्रीय स्तर पर उठाया मुद्दा

सुदेश महतो ने बताया कि आजसू पार्टी ने 16 संगठनों के साथ मिलकर इस मुद्दे को भारत सरकार के समक्ष रखा है और गंभीर विचार-विमर्श के लिए प्रस्ताव सौंपा है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की कि वे जल्द से जल्द इस मुद्दे का समाधान निकालें, ताकि कुड़मी समाज को ऐतिहासिक न्याय मिल सके और उनका आक्रोश शांत हो।

कुड़मी समाज की मांगें ऐतिहासिक और जायज

उन्होंने दोहराया कि 1931 में कुड़मी समुदाय को एसटी सूची से हटाने का निर्णय अन्यायपूर्ण था, और तब से यह समाज अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है। सुदेश महतो ने सरकार से मांग की कि आंदोलन की गंभीरता को समझते हुए त्वरित और ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया जा सके।

आजसू पार्टी ने कुड़मी समाज के इस आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया है और सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपील की है।

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