MMDR Amendment Bill 2026 पर हेमंत सोरेन का PM मोदी को खुला पत्र, क्लॉज 2, 3, 4 और 5 पर पुनर्विचार की मांग

रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखा है। मुख्यमंत्री ने बिल के क्लॉज 2, 3, 4 और 5 पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि प्रस्तावित संशोधनों से राज्यों की संवैधानिक, राजकोषीय और संघीय शक्तियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि MMDR Amendment Bill, 2026 (Bill No. 154 of 2026) को 10 अगस्त 2026 को लोकसभा में पेश किया गया। झारखंड सरकार ने बिल में प्रस्तावित प्रावधानों की समीक्षा की है और राज्य के हितों तथा संवैधानिक अधिकारों के दृष्टिकोण से केंद्र सरकार से इस पर समग्र रूप से पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।
Section 9D को लेकर झारखंड की बड़ी आपत्ति
हेमंत सोरेन ने पत्र में विशेष रूप से प्रस्तावित Section 9D का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, इस प्रावधान के जरिए राज्य सरकारों की उस शक्ति को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके तहत वे mineral rights या mineral-bearing lands पर टैक्स, सेस अथवा अन्य लेवी लगा सकती हैं।
मुख्यमंत्री का तर्क है कि यदि यह प्रतिबंध केवल mineral rights तक सीमित रहता है तो इसे अलग संवैधानिक संदर्भ में देखा जा सकता है, लेकिन यदि इसका विस्तार mineral-bearing lands पर राज्य द्वारा लगाए जाने वाले कर तक किया जाता है, तो यह संविधान में राज्यों को प्राप्त कराधान शक्ति को प्रभावित कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का दिया हवाला
हेमंत सोरेन ने अपने पत्र में Mineral Area Development Authority बनाम Steel Authority of India Limited मामले में सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई 2024 के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया है।
नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के फैसले में बहुमत ने संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की Entry 49 के तहत खदानों और खनिज क्षेत्रों वाली भूमि पर कर लगाने की राज्यों की विधायी क्षमता को मान्यता दी थी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस उद्देश्य के लिए mineral-bearing land को “land” के दायरे में माना जा सकता है और खनिज की उपज अथवा उसके मूल्य को भूमि पर लगाए जाने वाले कर के निर्धारण के आधार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसी आधार पर झारखंड सरकार का कहना है कि Entry 49 और Entry 50 के बीच अंतर महत्वपूर्ण है। राज्य का दावा है कि Entry 50 के तहत संसद द्वारा खनिज विकास से संबंधित कानूनों के जरिए लगाई जाने वाली सीमाओं को Entry 49 के तहत भूमि पर राज्य की कराधान शक्ति पर स्वतः लागू नहीं किया जा सकता।

Jharkhand Mineral Bearing Land Cess Act का भी उल्लेख
मुख्यमंत्री ने पत्र में Jharkhand Mineral Bearing Land Cess Act, 2024 का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि यह कानून राज्य की विधायी प्रक्रिया के तहत बनाया गया है और इसका उद्देश्य खनिज-युक्त भूमि पर सेस लगाकर उससे प्राप्त राजस्व का इस्तेमाल जनकल्याणकारी कार्यों में करना है।
पत्र के मुताबिक, इस राशि का इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, पेयजल, स्वच्छता, कृषि और अन्य आवश्यक क्षेत्रों में किया जाना है।
राज्य सरकार ने इसके लिए Jharkhand Mineral Bearing Land Cess Rules, 2024 भी बनाए हैं, जिनमें सेस से प्राप्त राशि के प्रशासन और उपयोग के लिए संस्थागत व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।
Clauses 2 और 3 को Section 9D से जोड़कर देखने की मांग
हेमंत सोरेन ने बिल के Clause 2 और Clause 3 पर भी आपत्ति जताई है। पत्र में कहा गया है कि Clause 2 के जरिए MMDR Act की Section 2 में संशोधन और Clause 3 के जरिए “mineral-bearing land” से संबंधित परिभाषा जोड़े जाने का प्रस्ताव है।
झारखंड सरकार का मानना है कि इन संशोधनों को प्रस्तावित Section 9D से अलग करके नहीं देखा जा सकता। राज्य के अनुसार, यदि Section 9D की संवैधानिक स्थिति पर पुनर्विचार आवश्यक है, तो उससे जुड़े Clauses 2 और 3 पर भी उसी संदर्भ में पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
केंद्र से क्या मांग की गई?
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि प्रस्तावित संशोधनों पर संवैधानिक, राजकोषीय, विकासात्मक और संघीय दृष्टिकोण से दोबारा विचार किया जाए।
झारखंड सरकार की प्रमुख मांग है कि यदि Section 9D के जरिए कोई सीमा लगाई जाती है तो उसे Entry 50 के अंतर्गत आने वाले mineral rights तक सीमित रखा जाए और mineral-bearing lands पर Entry 49 के तहत राज्यों की कराधान शक्ति को प्रभावित करने वाले प्रावधानों को वापस लिया जाए।
हेमंत सोरेन ने पत्र में कहा है कि खनिज संसाधनों से जुड़े राजस्व और उनके उपयोग का सवाल झारखंड जैसे खनिज-संपन्न राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में राज्य के संवैधानिक अधिकारों और संघीय ढांचे के बीच संतुलन बनाए रखते हुए बिल पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
MMDR Amendment Bill, 2026 को लेकर झारखंड की आपत्ति केवल एक प्रस्तावित सेस या टैक्स तक सीमित नहीं है। बल्कि खनिज-युक्त भूमि पर राज्य द्वारा कर लगाने की संवैधानिक शक्ति को संसद द्वारा MMDR Act में संशोधन के जरिए अब इसे किस सीमा तक प्रभावित किया जा सकता है। ये देखने वाली बात होगी। झारखंड सरकार का तर्क है कि राज्य की भूमि-कराधान शक्ति को सुरक्षित रखना संघीय ढांचे के लिए भी जरूरी है।
















