Which government’s reputation hasn't been tarnished by the paper leak scandal?

पेपर लीक और राजनीति, प्रधान के इस्तीफे से छात्रों को क्या मिला,  किस सरकार के दामन पर दाग नहीं?

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डेस्क । प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक भारत की सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौतियों में से एक बन चुका है। हालिया घटनाओं के बाद यह मुद्दा फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में है। लेकिन सवाल यह है कि क्या पेपर लीक केवल किसी एक सरकार या एक राजनीतिक दल की समस्या है? उपलब्ध रिकॉर्ड और पिछले दो दशकों की घटनाएं बताती हैं कि लगभग हर स्तर पर—केंद्र और राज्यों में—विभिन्न सरकारों के दौरान पेपर लीक या परीक्षा अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं।

पिछले 25 वर्षों की प्रमुख घटनाएं

कैट (CAT) परीक्षा — नवंबर 2003: देश के प्रबंधन संस्थानों (IIM) के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा का पर्चा लीक हुआ था, जिसमें बाद में सीबीआई जांच के दौरान प्रिंटिंग प्रेस की गड़बड़ी सामने आई थी।

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) — 2003: राज्य गठन के बाद अजीत जोगी के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय पहली पीसीएस परीक्षा में ओएमआर शीट बदलने और भाई-भतीजावाद के बड़े आरोप लगे थे।

सीबीएसई पीएमटी (AIPMT) — 2004: ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट का प्रश्नपत्र लीक हुआ था, जिसके बाद कुछ क्षेत्रों में परीक्षा दोबारा करवानी पड़ी थी।

सीबीएसई 12वीं बिजनेस स्टडीज/अकाउंटेंसी — 2006: इस वर्ष बारहवीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा के कुछ प्रश्नपत्र समय से पहले लीक होने के मामले आए थे।

एआईईईई (AIEEE) — 2007/2011: अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के पर्चे लीक होने की खबरों के बाद परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे।

हरियाणा बोर्ड परीक्षा — 2011: हरियाणा में दसवीं और बारहवीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा के पेपर आउट होने के मामले दर्ज किए गए थे।

एम्स (AIIMS) प्रवेश परीक्षा — 2012: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की प्रवेश परीक्षा में नकल और सॉल्वर गैंग से जुड़े irregulatories (अनियमितताएं) सामने आए थे।

राजस्थान यूनिवर्सिटी और आरपीएससी (RPSC) — 2013: राजस्थान में विश्वविद्यालय परीक्षाओं और आरपीएससी से जुड़े कुछेक पर्चे लीक व वायरल होने की घटनाएं हुईं थीं।

सीबीएसई 10वीं (गणित) और 12वीं (अर्थशास्त्र) — 2014: इस साल मार्च-अप्रैल के दौरान सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के ये मुख्य पेपर लीक हो गए थे, जिसके बाद काफी हंगामा हुआ था।

राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक भर्ती परीक्षा — 2023: अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आरपीएससी द्वारा आयोजित वरिष्ठ शिक्षक भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ था, जिसके बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी।

2007–2013: मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला, जिसमें मेडिकल, भर्ती और अन्य परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे।

2015: AIPMT (मेडिकल प्रवेश परीक्षा) पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी।

2017–18: SSC CGL परीक्षा विवाद और CBSE के प्रश्नपत्र लीक ने राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन कराए।

2021: राजस्थान REET परीक्षा पेपर लीक।

2022: बिहार BPSC 67वीं परीक्षा रद्द।

2024: NEET-UG विवाद, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा और RO/ARO परीक्षा रद्द।

2025–26: विभिन्न राज्यों में भर्ती परीक्षाओं और राष्ट्रीय परीक्षाओं को लेकर फिर विवाद और विरोध प्रदर्शन।

झारखंड के पुराने पेपर लीक और परीक्षा विवाद

1st JPSC सिविल सेवा घोटाला (2003): राज्य की पहली ही जेपीएससी परीक्षा में ओएमआर शीट में हेरफेर और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप लगे, जिसकी जांच बाद में सीबीआई (CBI) को सौंपी गई।

2nd JPSC सिविल सेवा घोटाला (2005): कॉपियों के मूल्यांकन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और पैरवी के आधार पर नंबर बढ़ाने का मामला सामने आया, जिसमें आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष और सदस्य जेल गए।

झारखंड प्राथमिक शिक्षक भर्ती (2012): इस शिक्षक पात्रता और बहाली परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायतों के बाद राज्य सरकार को सीबीआई जांच की सिफारिश करनी पड़ी थी।

JSSC इंटरमीडिएट स्तर परीक्षा (2017): इस कंप्यूटर ज्ञान और हिंदी टाइपिंग परीक्षा का प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर लीक हो गया था, जिसके बाद आयोग ने परीक्षा को रद्द कर दिया था।

झारखंड उत्पाद सिपाही (Excise Constable) परीक्षा (2019): परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले इसके प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी (Answer Key) व्हाट्सएप पर वायरल हो गए थे, जिससे काफी हंगामा हुआ था।

6th JPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा (2019): परीक्षा के दौरान ही प्रश्नपत्रों के बंडल के सील पहले से टूटे होने के आरोप अभ्यर्थियों ने लगाए थे, जिससे पेपर लीक का अंदेशा जताया गया था।

7th-10th JPSC संयुक्त परीक्षा (2021): एक ही परीक्षा केंद्र (लोहरदगा और साहिबगंज) के कमरों से लगातार रोल नंबर वाले अभ्यर्थियों के पास होने पर पेपर लीक और सेटिंग के गंभीर आरोप लगे थे।

JSSC जूनियर इंजीनियर (JE) परीक्षा (3 जुलाई 2022): परीक्षा के ठीक बाद प्रश्नपत्र और उत्तर सोशल मीडिया पर लीक पाए गए, जिसके बाद जेएसएससी ने पूरी परीक्षा को रद्द कर दिया था।

केवल एक दल नहीं, लगभग हर सरकार घिरी

आंकड़े बताते है कि कांग्रेस, भाजपा और विभिन्न क्षेत्रीय दलों की सरकारों वाले राज्यों में अलग-अलग समय पर पेपर लीक या परीक्षा अनियमितताओं के मामले सामने आए। जानकारों का मानना है कि यह समस्या किसी एक दल से अधिक परीक्षा व्यवस्था, भर्ती तंत्र और संगठित अपराध के गठजोड़ से जुड़ी है।

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शिक्षा मंत्री बदलते रहे, चुनौती बनी रही

केंद्र में सिर्फ मोदी सरकार में अलग-अलग समय पर स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, धर्मेंद्र प्रधान सहित कई शिक्षा मंत्रियों के कार्यकाल में परीक्षा सुरक्षा को लेकर सवाल उठे। हालांकि प्रत्येक मामले की प्रकृति और जिम्मेदारी अलग-अलग रही तथा सरकारों ने समय-समय पर जांच और सुधार के कदम उठाने की बात कही।

कानून बना, फिर भी क्यों नहीं रुके पेपर लीक?

2024 में केंद्र सरकार ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act लागू किया, जिसमें पेपर लीक जैसे अपराधों के लिए कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल कानून पर्याप्त नहीं है; परीक्षा प्रबंधन, डिजिटल सुरक्षा, प्रिंटिंग, लॉजिस्टिक्स और जवाबदेही की पूरी व्यवस्था मजबूत करनी होगी।

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हालिया घटनाओं के बाद विपक्ष सरकार को घेर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ा नुकसान लाखों अभ्यर्थियों का होता है, जिनकी तैयारी, समय और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। दो दशकों का रिकॉर्ड बताता है कि पेपर लीक किसी एक सरकार, एक दल या एक राज्य तक सीमित समस्या नहीं है। यह भारतीय परीक्षा व्यवस्था की संरचनात्मक कमजोरी है, जिसका स्थायी समाधान केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं बल्कि संस्थागत सुधार, तकनीकी सुरक्षा और जवाबदेही से ही संभव है।

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